जीमूतवाहन की कहानी vikram betal ki kahaniya

राजा जीमूतवाहन,

जीमूतवाहन इसके बाद बेताल राजा को एक अन्य कहानी सुनाने लगा बहुत समय पहले की बात है हिमाचल प्रदेश में जीमूतवाहन नामक एक राजा शासन करता था वह बहुत धार्मिक स्वभाव वाला था राजा को एक बेटा था अग्निवाहक वो बहुत दुष्ट स्वभाव का था एक दिन जब राजा दरबार में बैठा था

तब अग्निवाहक वहां जाकर अपने पिता से बोला मैं सिहासन पर बैठना चाहता हूं बेहतर होगा कि आप मुझे राजा बना दें यह सुनकर राजा और उसके दरबारी हैरान हो गए जीमूतवाहन शांतिप्रिय शासक था उसे अपने बेटे से बहुत प्यार था इसलिए वह सिहासन से उतर आया इसके बाद उसने ऐलान कर दिया कि वह तपस्या करने के लिए जंगल में जा रहा है

इधर राजा बनते ही अग्निवाहन प्रजा पर अत्याचार करने लगा लोग बहुत नाराज हुए उधर जीमूतवाहन वन में तपस्या कर रहा था तभी एक औरत रोती हुई उसके पास गई और कहा एक ही बेटा है एक राक्षस ने आज रात उसको खाने की धमकी दी है उसने कल आकर कहा था कि अपने बेटे को मेरा भोजन बनने के लिए तैयार रखना अगर ऐसा नहीं किया तो मैं सब को खा जाऊंगा वो औरत बहुत जोर जोर से रो रही थी राजा ने उसे दिलासा दिया तो थोड़ा शांत हुई राजा ने उससे कहा मैं तुम्हारा बेटा बन कर बैठ जाऊंगा जब राक्षस आए तो तुम बता देना कि यह मेरा बेटा है

और वो औरत ऐसा नहीं करना चाहती थी लेकिन राजा ने उसे इसके लिए तैयार कर लिया जब राक्षस उस औरत के बेटे को खाने आया तो राजा ने स्वयं को उसके आगे कर दिया राक्षस ने राजा को खा लिया और उस औरत के बेटे की जान बच गई राजा उस औरत के बेटे के भेस में था राक्षस ने उसे एक आम आदमी समझा और देखते ही देखते खा गया वह औरत अपने बेटे को लेकर वहां से चली गई राजा जीमूतवाहन ने उस औरत के बेटे की जान बचाने के लिए अपनी जान गवा दी

बेताल ने राजा विक्रमादित्य को यह कहानी सुना के कहा विक्रम तुम राजा के बलिदान के बारे में क्या कहोगे:- राजा ने उत्तर दिया मुझे नहीं लगता कि राजा जीमूतवाहन ने अपना बलिदान देकर कोई भला काम किया है उसने तो मोक्ष पाने के लिए ही ऐसा किया जीमूतवाहन अपने दुष्ट बेटे के बारे में सब कुछ जानता था फिर भी बेटे के धमकाने पर उसने अपना राज्य उसे सोप दिया के राजा अग्निवाहक के अत्याचारों से सारी प्रजा दुखी थी और अनेक कष्ट सह रही थी क्या जीमूतवाहन को उसके कार्य के लिए क्षमा किया जाना चाहिए यदि वो चाहता तो अपने दुष्ट पुत्र से अपना शाशन वापस लेकर अपनी प्रजा की रक्षा कर सकता था

 लेकिन उसे तो मोक्ष पाना था उसे दूसरों के कष्ट से क्या लेना देना था इसलिए उसने अपने को राक्षस के हवाले कर दिया

बेताल ने कुछ देर सोच कर कहा मुझे लगता है तुमने सही उत्तर दिया है लेकिन तू बोला इसलिए मैं वापस चला फिर बेताल राजा के कंधे से उड़कर पीपल के पेड़ की ओर चल दिया और राजा तलवार लेकर उसके पीछे दौड़ने लगे

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