परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग- एक गरीब बच्चे की प्रेरणादायक कहानी

दोस्तों महेनती लोगो को इश्वर भी मदद करता है। दुनिया में जितने भी लोग बड़े बड़े मुकाम हासिल किये है, जैसे की सचिन तेंडुलकर, facebook के स्थापक मार्क झुकरबर्ग, अम्बानी परिवार वैसे कई लोगो ने महेनत के दम पर उचाईया हासिल की है। कठिन परिश्रम हमारे जीवन को किस प्रकार से आत्मनिर्भर बनाता है और हमें सफलता दिलाता है। यह एक परिश्रम पे मजेदार कहानी, परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग है…

परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग

परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग
परिश्रम का महत्व

कठिन परिश्रम-एक गरीब बच्चे की प्रेरणादायक कहानी

यह कहानी है ,एक लड़के की जो काफी गरीब परिवार से था। उसके मां-बाप भी काफी गरीब थे, लेकिन वो लड़का कभी मेहनत करने से कभी नहीं चुकता था।

वह काफी मेहनती लड़का था, मेहनत करके वह अपनी स्कुल की फीस जमा करता था। और एक समय पर खाना नहीं खा कर वह जो खाने का पैसा बचता था उससे वह किताबें खरीद लेता था, ताकि वह मन लगाकर पढ़ाई कर सके और एक दिन बड़ा आदमी बन सके। लेकिन उसके सारे सहपाठी, साथी काफी ज्यादा उससे जलते थे। और उस लड़के में कोई न कोई बुराई ढूंढते रहेते थे।

सहपाठी बच्चो की उस लडके पे लांछन लगाने की आइडिया

एक दिन उन लड़को ने उस पर लांछन लगाना चाहा, और उनको झूटे आरोप में फसाने का फैसला किया। एक दिन स्कूल के प्राचार्य अपने कक्ष में बैठे हुए थे, तभी वे सब बच्चे उस लड़के की शिकायत लेकर वहां पहुंचे और प्राचार्य जी से बोले – यह लड़का रोज कहीं से पैसा चुराता है और चुराए हुए पैसे से अपने स्कूल की फीस जमा करता है। प्राचार्य जी आप इसका जांच कीजिए। और इसकी चोरी पकड़कर उसे दंड दीजिये।

प्राचार्यजी ने उस लड़के की ओर देखा और पूछा- क्या यह सब जो बच्चे बोल रहे हैं, क्या वो सच है बेटे,…

लड़का बोला- प्राचार्य महोदय! मैं बहुत ही निर्धन हूं। बहोत ही गरीब हु, लेकिन मैंने आज तक कभी भी किसी चीज की चोरी नहीं की, जो भी मैंने कमाया है। मेहनत से कमाया है। प्राचार्य ने उस लडके की बात सुनी और जाने के लिए कह दिया।

लेकिन सारे बच्चो ने प्राचार्य से बार बार निवेदन किया की इस लड़के के पास इतने पैसे कहा से आते है, इसका पता लगाना जरूरी है। तो प्राचार्य ने जांच करने के लिए एक कमेटी गठित की और जांच करने पर पाया गया कि वह लड़का स्कूल के खाली समय में एक माली के यहां पौधो को सिचाई (पानी) देने का काम करने जाता है। और वहां से उसे कुछ पैसे मिल जाते हैं और उस पैसे से वह स्कूल की फीस जमा करता है।

अगले दिन उन लडके की चकासनी के बाद

अगले दिन प्राचार्यजी ने उस लड़के को और अन्य सभी बच्चों को अपने कक्ष में बुलाया और उस लड़के की तरफ देखकर उन्होंने प्यार से पूछा- बेटा तुम इतने निर्धन हो अपने स्कुल की फीस माफ क्यों नहीं करा लेते।

उस निर्धन बालक ने स्वाभिमान से उत्तर दिया,- प्राचार्य महोदय, जब में अपनी महेनत से स्वयं को सहायता पहोचा सकता हूं, तो में अपनी गिनती असमर्थ लोगो में क्यों करावाऊ।

कर्म से बढ़कर कोई पूजा नहीं होती। ये तो मैंने आपसे ही सीखा है। छात्र की बात से प्राचार्य महोदय का सिर गर्व से ऊंचा हो गया और बाकी बच्चे जो उस लड़के को गलत साबित करने में तुले हुए थे, उन्हें भी काफी ज्यादा पछतावा हुआ और उन्होंने उनसे माफी मांगी।

मेहनत करके, अपने दम पर कमाने में विश्वास रखने वाला वह निर्धन बालक कोई और नहीं, सदानंद चट्टोपाध्याय था। जो बड़ा होने पर ठीक 20 वर्ष बाद, इन्हें बंगाल के (शिक्षा संगठन के डायरेक्टर का बड़ा सा पद सौंपा गया।)

सोचिये एक ऐसा लड़का जो काफी निर्धन, घर परिवार भी गरीब लेकिन फिर भी मेहनत से उसने वो मुकाम हासिल किया, पाया। की इस मुकाम तक पहुंचने के लिए हर कोई सपना देखता है।

सदानंद चट्टोपाध्याय के प्रेरक प्रसंग की सिख

उन्होंने बहुत ही अच्छी बात हम सब को सिखाई है की मेहनत और सच्चाई पर हमेशा विश्वास करना चाहिए। जो आपको आपकी मंजिल तक पहुंचाने में हमेशा मदद करेंगे। अपनी महेनत पर विश्वास रखना ही आपको सफलता दिला सकती है। मित्रो सफलता, असफलता का अपना अपना पड़ाव होता है। हमेशा इस बात पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए कि हमें पूरे मन से ही महेनत व परिश्रम करना चाहिए। और कठिन परिश्रम से ही हम सफलता प्राप्त कर सकते हैं।

यदि आप लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो संघर्ष और कड़ी महेनत करके ही पहुंच सकते हैं।

तो यह कहानी आपको यह कहानी कैसी लगी, जो जीवन में हंमेशा आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती रहेगी।

परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग

परिश्रम का महत्व, parishram ka mahatv

एक कहावत कही गई है, ”जब हौसला बना लिया ऊंची उड़ान का फिर देखना फिजूल है कद आसमान का”  परिश्रमी आदमी वह कभी भी अपने नियम का उल्लंघन नहीं करता है।, वह पर्वतो को काटकर सड़क बना सकता है, नदियों पर पुल बना सकता है,  जिन रास्तो पर कांटे होते हैं उन्हें वह सुगम बना सकता है,  समुद्रो की छाती को चीर कर आगे बढ़ सकता है,

नदिया भी दिन रात यात्रा करती रहती है। वनस्पतिया भी वातावरण के अनुसार  परिवर्तित होती रहती है। कीड़े, पशु, पक्षी अपने दैनिक जीवन में व्यस्त रहते हैं। ऐसा कोई भी कार्य नहीं जो परिश्रम से सफल न हो सके,  जो पुरुष दृढ प्रतिग होते हैं उनके लिए विश्व का कोई भी कार्य कठिन नहीं होता। वास्तव में बिना श्रम के मानव जीवन की गाड़ी नहीं चल सकती।

जब मनुष्य के जीवन में परिश्रम खत्म हो जाता है तो उन के जीवन की गाड़ी रुक जाती है। अगर हम परिश्रम न करें तो हमारा खुद का खाना, पीना, उठना, बैठना भी संभव नहीं हो पाएगा। जिन व्यक्तिओ के जीवन में आलस भरा होता है वह कभी भी जीवन में उन्नति नहीं कर सकते है। श्रम से ही उन्नति और विकास का मार्ग खुल जाता है।

परिश्रम और लगन, प्रयास की बहुत महिमा होती है। मनुष्य परिश्रम नहीं करता तो आज संसार में कुछ भी नहीं होता, आज संसार ने जितना उन्नति की है वह सब परिश्रम का ही परिमाण है। इसलिए कहा गया है कि परिश्रम का बहुत महत्व होता है । जय श्री कृष्ण ।।

परिश्रम पर प्रेरक प्रसंग

मेरी कलम से कुछ वाक्याश

  • परिश्रमी आदमी कभी किसी पे निर्भर नहीं होता है।
  • किसी भी क्षेत्र या काम में सफलता पाने का एक ही मंत्र है ‘परिश्रम’
  • अगर मनुष्य परिश्रम न करे तो उन्नति और विकास की कभी कल्पना ही नहीं की जा सकती थी।
  • सही दिशा और इमानदारी से किया हुआ परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता है।
  • हमने हमेशा देखा है की स्कुल में ज्यादा परिश्रम करने वाले विद्यार्थी हंमेशा अव्वल आते है और आगे जाके कुछ बड़ा करते है।

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