प्यासा कौवा हिंदी शोर्ट कहानी

दोस्तों में आज आपको प्यासा कौवा की पुराणी और चर्चीत कहानी है। जिसे बार बार पढ़ाने से मझा आएगा।

प्यासा कौवा

गर्मियों का मौसम था। सूरज के प्रकोप से सभी लोग पानी से बेहाल हो गए थे। पानी की वजह से कई तरह की परेशानिया उठानी पड रही थी। इन्शानो के साथ साथ पक्षियों और प्राणियो पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा था। वही एक कौवा भी पानी की कमी से बहोत पीड़ित था। कौवा काफी समय से प्यासा था। पानी की तलाश में कौवा जंगल से निकला और पानी ढूढते-ढूढते गाव की तरफ आ गया।

pyasa kouva hindi kahani
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गाव के एक छोटे से घर के बहार एक मटका देखकर वो कौवा रुक जाता है। मटके के अन्दर थोडा सा पानी था। जो कौवे की प्यास बुझा सकता था।

कौवा: हा काउ इस पानी को मेरा ही इंतजार था। उ… मुझे मटके का पानी पीना है। पर कैसे पिऊ मटके में तो थोडा सा ही पानी है। इसे किसी तरह उचाई तक ला सकू तभी में ये पानी पि सकता हु। हा अगर में मटके के अन्दर कंकर डालता हु तो पानी ऊपर आ जायेगा। और तभी में ये पानी पि सकता हु।

कंकर डालता है कौवा ।

कौवा बाजुमे पड़े कंकर उठाता है और मटके में डालने लगता है। कौवा पानी पिने के लिए एक के बाद एक कंकर उठता और मटके में डालता गया। और धीरे धीरे वो मटका कंकरों से भरने लगता है। और पानी ऊपर आने लगता है। पानी इतना ऊपर आ जाता है की कौवा वो पानी पि सके। और कौवे ने मझे से पानी पि लिया और अपनी तरस बुझाई।

प्यासा कौवा
प्यासा कौवा

कौवा: अरे वह माझा आ गया मेरी महेनत रंग लाई।

पानी के बिना ही जीवन अधुरा। पानी करे सबके जीवन को पूरा, पानी का पहेचानो मोल, पानी आपने जीवन में बहोत अनमोल है, इसका इस्तेमाल जरुर के हिसाब से करे अन्यथा व्यर्थ न करे।

सिख: की अपनी बुध्धि का सही इस्तेमाल करके हम किसी भी संकट से बहार आ सकते है। किसी भी परिस्थिति में हर न मनानी चाहिए प्रयत्न करना चाहिए।

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