भूत की कहानी डरावनी , bhoot ki kahani

भूत की कहानी डरावनी: यहाँ पे हमने दोस्तों सच्ची भूत की कहानिया दी है जो आपको अचूक पसंद आएगी ऐसी मेरा मानना है. धन्यवाद

भूत की कहानी डरावनी
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भूतिया सड़क का छोटा सा पुल – Bhoot ki kahani

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दोस्तों ये कहानी दो साल पहेले की है। हमारे गाव से थोडा दूर ही एक रास्ता जाता है। वहा पे दिन में तो बहोत सारे गाड़िया चलती है पर शाम होते ही बंध हो जाती है। गावो का लोग रात को कभी नहीं घर से बहार जाते कोई जरुरी काम हो तो ही शहर में जाते है।

उस रस्ते पे एक नाला है, एक छोटा सा पुल है। उन के ऊपर से रास्ता जाता है और ठीक वही पुल के आगे थोडा सा रास्ता मुड़ा हुआ है।

काफी समय से वहा पे थोड़े थोड़े दिनों में एक्सीडेंट होता रहेता है। और काफी लोग मर भी चुके है इसी पुल के ऊपर एक्सीडेंट से,

वहा का रास्ता वेरान है की वहा आस पास में 2 मिल तक कोई घर नहीं है। सिर्फ रास्ता ही है।

ये कहानी हमारे गाव के भीखूकाका की है।

भीखू काका एक बहोत ही धार्मिक स्वाभाव के थे, वो इश्वर में बहोत मानते थे इसलिए वो जहा भी भजन सत्संग का प्रसंग होता वहा उनकी हाजरी होती थी, जरुर जाते थे।

एक दिन की बात है भीखू काका के दुसरे गाव में भजन सत्संग के सूचना मिली और उस दिन पूनम थी इसलिए दिखाई तो देता ही था। भीखूकाका अपनी साइकल ले के शाम को निकल गए। भजन में शामिल होने के लिए। और पहोच भी गए वहा प्रोग्राम पूरा होने तक वह हाजिर रहे।

जब भजन का प्रोग्राम पूर्ण हुआ

लेकिन अब रात के 1 बजा था की वहा प्रोग्राम पूर्ण हो गया सभी लोग अपने अपने घर जाने लगे और एक के बाद एक निकल रहे थे। अपने गाव से मात्र तिन किमी ही था रास्ता लेकिन रात का तो समय था।

भीखू काका अपनी साइकल निकाली और अकेला ही घर जाने के लिए निकल गया। भजन की धुन गुनगुनाता वो वेरन रस्ते पे अकेला ही गुजर रहा था। थोड़े दूर जाते ही एक छोटे से नाले के ऊपर साइकल गुजरते ही सायकल की चेइन उतर गई। साइकल चलना बंध हो गई वहा आस पास देखा तो कोई था ही नहीं लेकिन कुछ पेड़ और सुमसाम रास्ता के अलावा कुछ था ही नहीं।

भीखू काका ने सायकल खीचकर पैदल चलने की कौशिस की लेकिन सायकल खीच ही नहीं पा रहा था। जैसे की उस नाले पे सायकल चिपकी सी हो और बिल्कुल ऐसा ही था। भीखू काका कितनी भी ताकत लगता लेकिन साइकल वो खीच नहीं पा रहा था।

अब धीरे धीरे भीखू काका बहोत डरने लगे थे। लेकिन करे तो क्या करे…

वो बहोत डर गए थे की आगे देखा तो बस थोड़ी ही दूर 5 मीटर के दुरी पे ही एक बड़ा सा आदमी धोती और सफेद खमिस पहेने हुए हाथ में एक डंडा और मुह में बीडी पि रहा था। भीखू काका ने उसे देखते ही पल भर में समझ गए की ये एक भूत है जो मुझे खा जायेगा या बहोत मरेगा।

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उसे देखते ही भीखू काका डर से पागल ही हो गए। वो चिल्लाये और अपनी सायकल छोड़ के उलटी दिशा में भागने लगे बहोत चिल्लाते चिल्लाते वो कापते हुए गाव में पाहोचे। उनकी आवाज सुनके गाव के एक दो बुजुर्ग लोग बहार निकले। भीखू काका ने उन लोगो के पास जाकर गिर गए। गिरते ही वो बेहोश हो गए।

गाव वालोने उसे हॉस्पिटल पहोचाया और अगले दिन भीखू काका अपने आप को हॉस्पिटल के बिस्तर पे पाया। वो भीखू काका जब होश में आये तब ये सारी घटना सभी को बताई। और इन सदमे से बहार निकलने के लिए भीखू काका को 5 महीने लगे।

भीखू काका अब दिन में भी अकेले तो इस रस्ते से कभी नहीं गुजरते।

भूत की कहानी

सिटी मारने वाला भूत की कहानी

भूत की कहानी भूत की कहानी

हमारे घर के आंगन के पास एक बड़ा सरकारी जीर्ण-शीर्ण घर है। वहा पे रात को कभी कभी क बार सिटी की आवाज जोरो से सुनाई देती है। लेकिन कौन बजा रहा है वो हमने कभी देखा नहीं ये सिलसिला तिन साल से चल रहा था। मम्मी पप्पा को ये बात मालूम थी की यहाँ कोई आत्मा निवास करती है। ये सिटी का कम उन्ही का है।

एक दिन हमारे घर फूफाजी आया था। उसको बीडी पिने की लत थी। गरमी का मौसम था इसलिए फूफा ने बहार सोने के लिए खटिया ले जाकर सोया।

रात के करीब 12;30 बजे जब वो बीडी पिने लगे उसी समय पे कोई सफेद वस्त्रो में चाचा उससे बीडी मांगी। फूफा ने उसे देखते ही दौड़ लगाई और घर में घुस गए और सभी को जगाया। फूफा इतना डर गया था की उनको जोरो से बुखार चढ़ गया और अगली सुभह ही अपने घर चला गया।

तबसे हमारे घर कभी नहीं महेमान आया।

मारने वाला भूत की कहानी

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दोस्तों ये कहानी ब्रिजेश की है

ब्रिजेश एक गाव में बसता था। उनका घर गाव में था, उनका परिवार के साथ साथ काफी गाय भेस भी पाल रखा था। और खेतिवाडी भी संभालता था।

ये घटना उन दिनों की है जब बारिश आने को होती है उस माह जून की है। जब बरसात आने वाली होती है तब गाव वाले पशुओ के लिए चारा अपने घर में या किसी दूसरी जगह जहा पे बारिश न गिर पाए ऐशी जगह रखते है।

ब्रिजेश ने भी अपनी गयो के लिए सुखा चारा उनके घर के आगे जर्जरित उनका ही बाप दादाओ का माकन था उसमे रखा था। वहा कोई रहेता नहीं था। ब्रिजेश और ब्रिजेश के घरवाले अपने नए माकन में रहेते थे।

ब्रिजेश को किसी पास वाले घरो के लोगो के साथ वैठके गप्पे मारना बहोत अच्छा लगता था। जब भी समय मिले तब वो किसी न किसी के साथ गप्पे या बाते करने के लिए किसी के भी घर चला जाता।

एक दिन शाम को जब वो किसी और के घर से बातें करके देर से घर आया, करीब 10 बजे जैसा समय था। और उस दिन उसकी गाय भेसो को किसीने चारा नहीं दिया था। इसलिए वो जोरो से भाभर रही थी। और इधर उधर घूम रही थी, इसलिए ब्रिजेश समझ गया की आज गाय भेसो को किसी ने चारा नहीं दिया है।

ब्रिजेश का भेसो के लिए चारा लेने जाना

इसलिए ब्रिजेश हाथ में टोर्च और एक छोटा सा कम्बल लेकर चारा लेने के लिए अपने ही पुराने माकन में गया जैसे चारा के लेने की कौशिश की ऊतने में ही कोई जोर जोर से मारने लगा वो पुछता रहा अरे भाई कौन हो? पर आस न पास कोई मारते ही जा रहा था। और वो कोई अद्रश्य ताकत उसे उठा उठा के पटक रही थी। वो वहा पे ही बेहोश हो गया।

जब सुभह हुई तब घरवालो ने देखा की ब्रिजेश अपने पुराने घर में बेहोश पड़ा है तब तुरंत ही हॉस्पिटल ब्रिजेश को ले जाया गया और जब ब्रिजेश होश में आया तब यह सारी घटना अपने घरवालो को बताई। सभी लोग डर गए। और इन सदमे से ब्रिजेश को निकालने में काफी समय लगा।

भूत की कहानी डरावनी

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