राजकुमारी शशिबाला की कहानी

राजकुमारी शशिबाला

राजकुमारी शशिबाला की कहानी
राजकुमारी शशिबाला की कहानी

कहानी राजकुमारी शशिबाला राजा विक्रमादित्य सावधानी से फिर से पीपल के पेड़ के पास पहुंचे, लाश पहले की तरह उल्टी लटकी हुई थी उन्होंने उस पेड़ से नीचे उतारा अपने कंधों पर रखा और अपने राज्य की ओर चल दिए रास्ते में बेताल ने उन्हें एक अन्य कहानी सुनाई

विक्रम बेताल की कहानी

 अवंती राज में शशिबाला नामक एक सुंदर राजकुमारी रहती थी एक दिन जब राजा दरबार में बैठा था तो चोल राज्य का राजकुमार वहां आया उसने राजा से कहा कि वह राजकुमारी शशिबाला से विवाह करना चाहता था यह सुनकर राजा को अच्छा लगा, चोल राज्य एक शक्तिशाली राज्य था लेकिन राजा को सोचने के लिए कुछ समय की जरूरत थी उन्होंने राजकुमार से पूछा तुम मे क्या हुनर है राजकुमार ने उन्हें बताया कि वो एक अच्छा तीरंदाज है वह आवाज सुनकर ही तीर चला सकता है और उसका निशाना कभी नहीं चूकता, राजा ने कहा यह तो बड़ी अजीब बात है आप मेरे मेहमान बन कर रहो, मैं अपनी बेटी से बात करके आपको जवाब दूंगा! फिर राजकुमार को मेहमान खाने में भेज दिया गया

वैशाली के राजकुमार

अगले दिन वैशाली के राजकुमार ने आकर शशिबाला का हाथ मांगा, राजाने उससे भी उसका हुनर पूछा वह बोला मैं बहुत सुंदर रेशम कात के रेशम बुन सकता हूं यह काम किसी दूसरे को नहीं आता मैं थोड़ा सा कपड़ा अपने इस्तेमाल के लिए रखने के बाद  बाकी सारा कपड़ा गरीबों को बांट देता हूं यह कहकर वैशाली के राजकुमार ने अपने-बुने हुए कपड़े का नमूना राजा को दिखाया राजकुमार की बातें सुनकर और कपड़े की कोमलता देखकर राजा हैरान रह गया

यह तो वाकई कमाल की बात थी राजा ने उसे भी अपने मेहमानखाने में  ठहरने को कहा, ताकि वह कोई फैसला कर सके वैशाली का राजकुमार किसी भी हाल में राजकुमारी शशिबाला से शादी करना चाहता था इसलिए उसने वहां ठहरने से मना नहीं किया वह जानता था कि इस मामले का निर्णय होने में थोड़ा समय लग सकता है

सुन्दर राजकुमारी शशिबाला की कहानी

उधर शशिबाला को उसके दासियों ने सूचना दी कि कोई राजकुमार उसका हाथ मांगने आया है फिर उन्होंने राजकुमार के हाथ के बुने हुए कपड़े का नमूना दिखाया जो शशिबाला को बहुत अच्छा लगा वो एक राजकुमारी थी और बहुत सुंदर वस्त्र पहनती थी, लेकिन ऐसा सुंदर और कारीगरी वाला कपड़ा उसने पहले कभी नहीं देखा था

तीसरा राजकुमार

शीघ्र ही दरबार में तीसरा राजकुमार आया वह भी राजकुमारी से शादी करना चाहता था उसने बताया कि वह एक महान विद्वान था उसने वेदों और उपनिषदों का सारा ज्ञान प्राप्त किया था इसके बाद चेदी राज्य का राजकुमार आया उसका दावा था कि उसे पशु पक्षियों की बोली आती है राजा ने उसे भी अपना मेहमान बना लिया चेधि का राजकुमार पशु पक्षियों की बोली हुबहू बोल सकता था यह बात जल्द ही सबको मालूम हो गई महल के बहुत से नौकर और नौकरानीया इस बात की परख करना चाहते थे

वे महेल के  के चिड़ियाघर से एक मोर और एक तोता ले आए राजकुमार ने उनसे बातें की और उन्हें पुछ्कारा ये देखकर सबलोग बहोत प्रसन्न हुए

राजा और रानी ने तय किया कि शशिबाला स्वयं अपने लिए स्वयं वर का चुनाव करेगी राजा ने राजकुमारी से कहा वो जिस वर को पसंद करें उसके गले में वरमाला पहना दे फिर उन्होंने तीनों राजकुमारों को बुलाकर एक साथ बैठा दिया

 थोड़ी देर बाद शशिबाला अपने हाथों में वरमाला लेकर आ गई

यह कहानी सुनकर बेताल ने राजा से पूछा राजा विक्रम अब तू बता राजकुमारी शशिबाला किसका चुनाव करेंगी अगर तूने सही उत्तर नहीं दिया तो तेरे सिर के टुकड़े-टुकड़े हो जाएंगे राजा विक्रमादित्य कुछ क्षण चुप रहे, वे जानते थे कि उनके बोलते ही बेताल वापस चला जाएगा राजा के पास कोई उपाय भी नहीं था वे बोले सुनो वेताल

कोई आदमी अपने कर्मों से ही ब्राह्मण शूद्र वैश्य क्षत्रिय होता है इसलिए राजकुमारी शशिबाला को एक क्षत्रिय से ही विवाह करना चाहिए शशिबाला अपने लिए चोल देश के राजकुमार को चुनेगी क्योकि वह एक क्षत्रिय यानी योद्धा है हम यह नहीं कह सकते कि बाकी तीनों राजकुमार गुणी नहीं है लेकिन प्रत्येक गुण का हर जगह एक महत्व होता है राजकुमारी ने उन तीनों राजकुमारों को भी अपने राज्य से सम्मान के साथ विदाई दी होगी तथा उनके गुण और कला की प्रशंसा की होगी

 बेताल बोला विक्रम तुमने सही उत्तर दिया एक क्षत्रिय ही राजकुमारी की सही पसंद हो सकती है लेकिन तू बोला इसलिए मैं वापस चला…

 यह कहकर बेताल पीपल के पेड़ की ओर उड़ने लगा फिर से राजा विक्रमादित्य उसके पीछे चलता है ताकि उसे लाकर अपना वचन पूरा कर सकें….

इन्हें भी पढ़े : प्यासा कौवा हिंदी शोर्ट कहानी

0 thoughts on “राजकुमारी शशिबाला की कहानी”

Leave a Comment