संगति का प्रभाव पर कहानी, अच्छी संगति के कारण राजा के पास बुद्धि आने लगी

यह एक राजा की कहानी है की अच्छी संगति के कारण राजा के पास बुद्धि आने लगी , राजू की बुध्धि की कहानी,संगति का प्रभाव पर कहानी बहोत ही बढ़िया है

संगति का प्रभाव कहानी
संगति का प्रभाव

संगति का प्रभाव पर कहानी,अच्छी संगति के कारण राजा के पास बुद्धि आने लगी

सोनपुर नामक नगर का राजा हरीशिंह एक बहुत ही वीर योद्धा था। उनके शासनकाल में राज्य बहोत सुरक्षित था। लेकिन राजा को अपने आप पर बहुत गर्व और घमंड था। उनका मानना ​​​​था कि उन्हें लोगों की परवाह है, इसलिए लोग खुश थे। और वो कहेतो की मैं अपने राज्य के लोगों की भलाई और स्वास्थ्य के लिए नए नए नियम बनाता हूं। इसलिए प्रजा सुखी है।

एक दिन सुबह के नाश्ते में ताजा गाजर का नाश्ता आया। राजा ने उसको खाया तब बहोत स्वादिष्ट और अच्छा लगा। उसने उनकी पुत्री राजकुमारी (सुंदरकुमारी) को बुलाया और यह पूछा की- कि गाजर कितनी स्वादिष्ट और पौष्टिक होती है! | सुंदरकुमारी कहती हैं, हां पापा!

राजा ने तुरंत दीवान को बुलाया और कहा। – अपने राज्य में आज ठंढेरा पिटवाओ की सभी को रोज सुबह सुभह हर रोज आज से गाजर खानी होगी। यही राज्य के राजा का आदेश है। इससे सभी के स्वास्थ्य में सुधार होगा।

संगति का प्रभाव

दीवान ने सैनिको को आदेश दे दिया- सैनिको ने घोडेसवारी करके सारे नगर में गली गली में जाके ढोल बजाय और कहा – राजा का आदेश है की सारे नगरवासियों कल से सुबह सुभह गाजर खायेगे जो कल से गाजर नहीं खायेगा आदेश है, सारे राज्य में यह समाचार मिल गया, और प्रजा को राजा की बात माननी ही पड़ती थी।

यह बात नगर के लोगों को कतई पसंद नहीं आई। लेकिन सभी ने आदेश का पालन किया। अठारह दिन तक गाजर खाने के बाद राजा हरीशिंह ऊब (थक) गए। और कहेने लगे – अब रोज गाजर खाना पसंद नहीं है मुझे । और वो उदास हो रहा था। यह राजा से सुनके उनकी पुत्री बोली,

सुंदरकुमारी ने कहा, “पिताजी, क्या नगरवासी भी ऊब गए होंगे?”

यह सुनके राजा ने सोचा नगरजनो भी इस गाजर खाने वाली बात से दुखी होंगे इसी वजह से तुरंत राजा ने आदेश जारी किया, रोज गाजर खाने की अब से कोई जरूरत नहीं है, जिसको जो भाए वह खा सकते हैं,

राजा को छिक आना

अगले दिन राजा को छींक आई, सुंदरकुमारी ने कहा, राजा भगवान हो! | बेटी का यह वाक्य सुनके राजा बहोत खुश हुआ। और बोला, संपूर्ण शहर के लोग मुझ पर छिक आने पर ,राजा भगवान हो, बोले! तो ‘मेरे लिए यह कितना अच्छा होगा! और सारे नगर में फिर से दीवानजी से नगारा पिटवाया और आदेश दिया की राजा को जभी भी छिक आएगी तब नगर में सभी नगरजनो ‘राजा भगवान हो  ऐसा बोलेगे,’

घंट बजते ही सभी ने एक ‘साथ राजा भगवान हो’ की बात कही।

नगर में एक बुध्धिमान राजू

राजू, एक गरीब और बुद्धिमान युवक भी राज्य में रहता था। वह राजा के ऐसे सनकी आदेशों से तंग आ गया था। उसने तुरंत राजा के सैनिको को कह दिया के मै राजा को भगवान नहीं कहूँगा । सैनिको ने तुरंत उसे राजा के सामने पेश किया गया ।

राजा ने उनसे कहा, तुम मेरी आज्ञा हो अनादर क्यों किया?

राजू कहते हैं, महाराज! मैं आपका अनादर नहीं करना चाहता। लेकिन मै आपको छिक खाते हुए देखे बिना आप भगवान है ऐसा नहीं कह सकता । राजा इन लडके राजू पे बहोत गुस्से हुआ, और बोला, इसे सिंह की गुफा में फेंक दो। मेरा आदेश नहीं मान रहा इसलिए ।

राजू को पहले से पता था इसलिए अपने पास वह मांस के टुकडे और नींद की गोलिया अपने पास छुपाके लाया था।

उसने गुफा में नींद की गोलियां छिड़क दीं। और वह कोने में छिप गया, शेर आया और मांस के टुकड़े खाकर सो गया । सुबह जब सिपाही राजू का शव लेने आए तो देखा कि राजू जीवित बैठा है। और शेर बहोत गहरी नींद सो रहा था! तुरंत उसे राजा के सामने लाया गया ।

उसे जिंदा देखके, राजा कहते हैं, यह कैसे हुआ?

राजू कहता है कि उसने इसे बुद्धिमानी से किया और पूरी बात राजा को कह सुनाई,

फिर राजा ने आदेश दिया की इसे जगली सूअर की गुफा में डाल दो, और सैनिको ने राजू को सूअर की गुफा में डाल दिया, लेकिन राजू होशियार था इसलिए वह अपने साथ एक छोटी सी बासुरी भी ले गया था, जैसे ही उसको सूअर की गुफा में डाला तब उसने घुसते ही गुफा में ऐसी बासुरी बजाई की, सूअर पूरी रात नाचती रही और सुबह थक कर बैठ गई,

राजू को जीवित देखा

जब सैनिक आए, तो राजू को जीवित देखकर वे चकित रह गए, और उसे फिर से राजा के सामने पेश किया गया।

अब राजा कहते हैं, तुम्हें मेरी आंखों के सामने महल में तब तक रहना है जब तक तुम्हें सजा देने का कोई नया विचार नहीं आता, ठीक है राजू ने कहा, ।

संगति का प्रभाव,

अब राजू राजा के साथ महल में रहने लगा | राजा से प्रतिदिन बात करने के बजाय राजू ने कहानियाँ सुनाना और सलाह देना शुरू कर दिया ताकि राजा को बुरा न लगे। एक कहावत है कि आप जिसके साथ रहते हैं उसका रंग लगता है। ‘राजा ने देखा कि राजू के कहने से काम करने पर लोग वास्तव में खुश होते है। अब राजा ने राजू की सलाह लेके ही राज्य में शाशन करने लगा, ।

राजा को पता चला की उनकी पुत्री सुंदरकुमारी भी राजू की बुध्धि की तारीफ करते करते थकती नहीं थी, इसलिए जल्द ही राजा को एक आइडिया आया की, अगले दिन राजा ने राजू और सुंदरकुमारी को आमने-सामने रख दिया और पूछा, “अगर तुम दोनों की शादी करवा दू , तो तुमको कोई वांधा तो नहीं है न!” – दोनों ने शरमाते हुए हां कर दी। राजा हरीशिंह ने तुरंत दोनों का विवाह करा दिया ।

राजा मन ही मन बोला, हाश! अब मेरा सलाहकार मुझे कभी छोडके नहीं जाएगा! एक कहावत है न कि जिससे आप जुड़ते हैं उसका रंग उसके ऊपर भी पड़ता है ‘जैसी संगत वैसी असर’। राजा को अब राजू के पास रहते रहते अब बुद्धि आने लगी थी! और राजू के बुध्धि की वजह से सारे नगरजनो खुश थे और सब ख़ुशी ख़ुशी रहने लगे ।

संगति का प्रभाव पर कहानी

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