एक संत की कथा सुनने रोज एक नाग आता था brahman or naag ki kahani.

संत और नाग की कहानी

brahman or naag ki kahani moral kahaniya

नमस्कार दोस्तों, आज में एक संत और नाग की कहानी की कहानी लेकर आया हु। जिनकी कथा हर रोज एक नाग सुनने आता था। एक समय की बात है। किसी गांव में एक ब्राह्मण अपने परिवार के साथ रहता था। उनके परिवार में उनकीपत्नी और एक पुत्र था। वह बहुत गरीब थे उनके पास कभी कभी खाने को भी नहीं होता था। ब्राह्मण की पत्नी बहुत दुष्ट और चालाक थी।

brahman or naag ki kahani
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वो रोज ब्राह्मण को भिक्षा मांगने जाने को कहती थी।पर ब्राह्मण उसकी एक नहीं सुनता था। और घर में बैठा राम नाम जाप करता रहेता। पत्नी के रोज रोज लज्जित करने पर ब्राह्मण एक दिन सुबह सुबह उठा और आपनी पोथी पत्रा उठा कर दूसरे गांव की ओर चल दिया चलते-चलते वो घने जंगल में पहुंचा। और अंधेरा हो गया वहां एक पीपल के पेड़ के नीचे बैठ गया और राम नाम जपने लगा।सुबह होने पर जब वो उठा तो पास के सरोवर पर स्नान करके वो आगे चला। और दूसरे गांव में पहुंचा गांव वाले उससे ना तो कोई कथा सुनना चाहते थे। और ना ही कोई उसे भिक्षा दे रहा था वह दुखी होकर घूम फिर कर फिर उसे पीपल के पेड़ के नीचे आकर बैठ गया।

संत और नाग की कहानी
संत और नाग की कहानी

संत और नाग की कहानी

वह पीपल का पेड़ बहुत विशाल था। उस पेड़ की जड़ में एक विशाल काला सांप रहता था। उस ब्राह्मण ने सोचा! कि मेरी कथा तो कोई नहीं सुनता। ये कथा में पीपल के पेड़ को ही सुना देता हूं। और अपनी कथा सुनाने लगा गया कथा पूर्ण होने पर। पेड़ के नीचे बिल में से काला नाग निकला। और इस ब्राह्मण को एक स्वर्ण मुद्रा देते हुए बोला तुम रोज यु ही यहां आकर मुझे कथा सुनाया करो। मैं रोज तुम्हें एक स्वर्ण मुद्रा दूंगा। ब्राह्मण ने यह बात मान ली और नाग बोला यह बात तुम किसी को भी मत बताना तुम्हारे सब दु:ख दूर हो जाएंगे।

ब्राह्मण हर रोज

ह्मण रोज ऐसा ही करता सुभह उठता नहा धोकर अपनी पोथी पत्र लेकर उस पीपल के नीचे पहुंच जाता। और वहां बैठकर कथा सुनाता कथा संपूर्ण होने पर नाग वहा पर आता और ब्राह्मण को एक मुद्रा भेट करता। देखते ही देखते ब्राह्मण के पास खूब धन सम्पति हो गई। पुरे गाव में ये चर्चा होने लगी की ब्राह्मण के दिन कैसे बदल गए। ये जरूर कोई गलत काम करता है। ब्राह्मण को लोगो की बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। वो नित्य अपना यही कार्य करता रहता था।

एक दिन गांव की कुछ औरते ब्रह्मणि के पास आई और उससे पूछने लगी कि आपके पति इतने धनवान कैसे हो गए। वो रोज कहां जाते हैं, और रोज उनकी कथा कौन सुनता है। औरतो की बात सुनकर ब्राह्मणी के मन में शंका आ गई। उसने एक दिन अपने पति से पूछा कि आपको यह धन कहां से मिलता है। मुझे भी बताएं ब्राह्मण बोला तुम्हे इससे क्या मतलब है। ऐसा कहकर ब्राह्मण ने ब्राह्मणी की बात टाल दी कुछ दिनों तक ब्राह्मण इसे टालता रहा पर एक दिन ब्राह्मणी ने ब्राह्मण को मजबूर कर दिया। मजबूर होकर उसने अपनी पत्नी को नाग की सारी बात बता दी।

पत्नी को लालच आ गई

जिस वजह से उसकी पत्नी के मन में लालच जाग गया। और उसने ब्राह्मण के खाने में नशे की दवा मिलाकर उसे खिला दिया और बेहोश कर दिया। और फिर अपने बेटे से बोली बेटा तुम उस पीपल के पेड पर जाओ और उस नाग को मारकर उसकी सारी सम्पति ले आओ। ब्राह्मण का लड़का ब्राह्मण का पोथी पत्रा लेकर वहां गया और पीपल के पेड़ के आगे बैठकर कथा सुनाने लगा। कथा पूरी होने पर वो नाग बाहर आया और उसको स्वर्ण मुद्रा देने लगा तभी ब्राह्मण के बेटे ने कुल्हाड़ी से नाग पर वार कर दिया! जिससे नाग की पूंछ कट गई, और नाग ने पलटकर लड़के के पैर में डस लिया जिससे लड़के की मौत हो गई।

ब्राह्मण का बेहोशी से स्वस्थ होना

उधर जब ब्राह्मण उठा तो उसने देखा कि उसके पोथी पत्रा गायब है। वह समझ गया कि कुछ गड़बड़ है। वो जल्दी से पीपल के पेड़ के पास गया तो देखता है कि उसका लड़का वहां मरा पड़ा है। ब्राह्मण को देख नाग बहार आया और बोला ब्राह्मण मैंने तुम्हें कहा था। कि स्वर्ण मुद्रा की बात तुम किसी से नहीं कहोगे अब तुम यहां से चले जाओ तुम्हें तुम्हारी पुत्र का दु:ख है। तो मुझे मेरी पूछ कटने का दु:ख है।

मैं तुम्हें श्राप देता हूं, “कि तुम्हारी जो संपत्ति मेरे द्वारा बनी थी वह सब नष्ट हो जाएगी” ब्राह्मण सर पीट कर रह गया, और रोता बीलगता अपने पुत्र का शब लेकर वहां से आ गया, और अपनी पत्नी से बोला, देखा तुम्हारे लालच की वजह से हमने अपना एकलौता पुत्र गवा दिया। और हमारी सारी संपत्ति नष्ट हो गई। ब्राह्मणी भी रोती रही,और घोर पछतावे के आलावा कुछ बचा ही नहीं।

शिख: दोस्तों लालच एक दलदल है, जो व्यक्ति को विनाश की ओर अग्रसर कर देता है। इसलिए लालच नहीं करनी चाहिए।

तो दोस्तों कैसी लगी आपको आज की हमारी यह कहानी हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजिएगा

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