best 10 akbar birbal ki kahani

akbar birbal ki kahani दोस्तों में यहाँ अकबर बीरबल की १० खुबसूरत कहानिया बता रहा हु,जो आपको बहोत पसंद आएगी,अगर आपको पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ साझा कीजिये facebook या whatsaap के जरिये दोस्तों को भी भेजिए. धन्यवाद… to read akbar birbal ki kahani

हिंदी कहानी : 1

बीरबल की खिचड़ी कहानी

बादशाह अकबर हमेशा कुछ नया करने में विश्वास करते थे। और इसके लिए धन भी खर्च करने में पीछे नहीं हटते थे।एक बार शहंशाह ने दरबार में घोषणा की जो व्यक्ति महल से बह रही नदी में पूरी रात खड़ा रहेगा उसे हम ढेर सारेधन से पुरस्कृत करेंगे। ठंडी रात में नदी के ठंडे पानी में रात भर रहना सबके बस की बात नहीं थी। एक गरीब के भी कानों तक जब शहंशाह की घोषणा की बात पहुंची तो उसके कान खड़े हो गए उसने सोचा कि चोर कोर निर्धनता में मर मर कर जीने से तो अच्छा है, कि मैं शाही घोषणा का पालन करते हुए पूरी रात नदी में गुजार दूं जिंदा रहा तो गरीबी से मुक्ति मिल जाएगी। और मर गया तो भी इस नरक की जिंदगी से छुटकारा मिल जाएगा यह सोचकर गरीब धोबी ने सारी रात नदी में खड़े रहकर ही गुजार दी।

akbar birbal kahani hindi mai
akbar birbal kahani hindi mai
akbar birbal ki kahani

दूसरे दिन वह दरबार में पहुंचा और शहंशाह से कहा, “जहांपनाह मैंने नदी में पूरी रात गुजार दी है।” अब मुझे शाही खजाने से इनाम दिया जाए। बादशाह अकबर ने उसे देखते हुए पूछा, “तुम्हारे पास इस बात का क्या सबूत है।” कि तुम सारी रात नदी में खड़े रहे है। सीधा साधा गरीब आदमी बोला जहांपनाह मैं पूरी रात राजमहल की छत पर जल रहे दीपक की लौ को देखता रहा। शहंशाह मुस्कुराते हुए बोले “अच्छा अब समझ में आया महल के चिराग की रोशनी की गर्मी के कारण तुम रातभर पानी में आराम से खड़े रह सके।” तुम इनाम के असली हकदार हो ही नहीं सकते।

शहंशाह का इतना कहते ही धोबी का मुख लटक गया| गरीब और कमजोर धोबी बादशाह से जुबान भी तो नहीं लड़ा सकता था। वह दरबार दरबार से बाहर आया और बीरबल के समीप पहुंचकर बोला ” हुजूर ” आप तो गरीबों के दोस्त हैं। मेरा ईश्वर जानता है मैंने सारी रात नदी के पानी में गुजार दी है। लेकिन बादशाह ने मुझे इनाम देने से इंकार कर दिया है।

बीरबल ने पूछा इसका कारण क्या है। धोबी ने बताया शहंशाह कहते हैं। कि तुमने राज महल के चिराग की लौ की गर्मी के कारण रात गुजरी है। भला तुम इनाम के हकदार कैसे बन सकते हो।

बीरबल को यह जानकर बड़ी ही हैरानी हुई और उन्होंने धोबी को सात्वना देते हुए कहा तुम धैर्य रखो मैं तुम्हें इनाम दिलवा दूंगा। धोबी भारी कदमों से घर को लौट गया। दूसरे दिन बीरबल जब दरबार में समय से नहीं पहुंचे तब शहंशाह ने एक नौकर को उन्हें बुलाने के लिए भेजा। नौकर बीरबल के पास से लौटकर आया तो शहंशाह ने उसको पूछा क्या हुआ बीरबल नहीं मिले! सैनिक ने वादे ही आदर से कहा | हुजुर बीरबल ने कहाः है की में खिचड़ी पका रहा हु और जब तक मेरी खिचड़ी नहीं पक जाती तब तक में आ नहीं सकता। यह सुनकर शहंशाह को बड़ा ही आश्चर्य हुआ कि बीरबल दरबार का काम छोड़कर आज खिचड़ी क्यों पका रहा है।

जब बीरबल का बहुत इंतजार करने के बाद भी दरबार में नहीं आए।

जब बीरबल का बहुत इंतजार करने के बाद भी दरबार में नहीं आए। तब बादशाह कुछ दरबारियों के साथ स्वयं बीरबल के घर की ओर गए। बीरबल के घर पहुंच कर उन्होंने देखा कि एक बहुत लंबे बांस के शीर्ष पर एक हांडी लड़की हुई है। और बीरबल उसके नीचे आग जला रहे थे। शहंशाह को बड़ी ही हैरानी हुई कि हांड़ी कहा है। और कही आग जला रहा है। ऐसे तो पूरी उम्र बीत जाने के बाद भी खिचड़ी नहीं पड़ेगी शहंशाह यह सोचते हुए बीरबल से बोले बीरबल यह क्या मूर्खता है? हांड़ी ऊपर बास में लटक रही है। और तुम यहां जमीन पर आग जला रहे हो तुम्हारी खिचड़ी भला कभी कैसे पक सकेगी।

क्यों नहीं पक सकेगी जहांपना! बीरबल ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा। लेकिन कैसे बीरबल आग हांड़ी तक पहुंची नहीं रही है। बादशाह ने आश्चर्य से कहा पहुंच रही है हुजूर बिलकुल वैसे ही जैसे महल के ऊपर चल रहे दीपक की रोशनी की गर्मी पाकर धोभी भी सारी रात नदी के पानी में खड़ा रह गया था। बीरबल ने अवसर का लाभ उठाते हुए अपनी बात कह दी। बीरबल के यह कहते ही बादशाह शर्मसार हो गए और उन्होंने धोबी को दरबार में बुलाकर शाही खजाने में से धन देने का हुक्म जारी कर दिया।

हिंदी कहानी : 2

बादशाह के अनमोल सवाल

आज दरबार समय से पहले ही लग गया था। बादशाह अकबर समय से पहले ही दरबार में आकर बैठ गए थे। शहंशाह अकबर की यह खासियत थी जब फुर्सत में होते थे तब तरह-तरह के विचार उनके मन में उत्पन्न हो जाया करते थे। और फिर वह दरबारियों से उनका समाधान पूछते थे। बीरबल आज दरबार में नहीं थे शहंशाह ने दरबारियों से पूछा “दूध किसका अच्छा, फूल किसका अच्छा, पत्ता किसका अच्छा, राजा कौन अच्छा, और मिठाई किसकी अच्छी,।

akbar birbal ki kahani hindi mai
akbar birbal ki kahani

शहंशाह के सवाल सुनते दरबारी आपस में फुश्फुशल करने लगे किसी दरबारी दरबारी ने गाय के दूध को अच्छा बताया। और किसी ने बकरी का दूध अच्छा बताया इस तरह किसी दरबारी ने गुलाब का फूल अच्छा बताया तो किसी दरबारी ने कमाल का, किसी दरबारी ने किले को पत्ते को अच्छा बताया, तो किसी दरबारी ने नीम के पत्तों को अच्छा बताया, किसी दरबारी ने राजा को कौन अच्छा है।जो अब मैं शहंशाह को अच्छा बताया। और अंतिम सवाल के जवाब में किसी दरबार ने गन्ना को अच्छा बताया। तो किसी दरबारी ने अंगूर को और किसी दरबारी ने मिष्ठान को अच्छा बताया। लेकिन बादशाह अकबरउनके जवाब से संतुष्ट नहीं थे।

akbar birbal kahani hindi mai

तभी दरबार में बीरबल आ गया। बादशाह के चेहरे पर उनको देखते ही चमक आ गई। और बीरबल के बैठने से पहले ही सांसद ने उपरोक्त पांचों सवालों के जवाब पूछे।

बीरबल कुछ पल तक शांत रहे फिर बोले “जहांपनाह मां का दूध सबसे अच्छा और हितकारी होता है। कपास का फल सबसे अच्छा होता है। क्योंकि इससे शरीर सबका ढक जाते हैं। पान का पत्ता सबसे अच्छा होता है। क्योंकि इसे खाकर दुश्मन भी दोस्त बन जाते हैं। राजाओं में इंद्र सबसे अच्छे हैं। क्योंकि उनके आदेश से बारिश होती है। और बारिश से धन-धान्य में वृद्धि होती है। और पूरे प्राणियों की खाने पिने की होती है। मिठास वाणी की सबसे अच्छे होते हैं। क्योंकि जिस की वाणी में मिठास होती है। वह सारे जगत को अपने वश में कर लेता है। शहंशाह ने सिहासन से उठकर बीरबल को गले से लगा लिया।

और कहा बीरबल तुमने अपने जवाब से मुझे बहोत ही खुस कर दिया है। फिर शहंशाह ने आदेश दिया की बीरबल को भेट दी जाए।

हिंदी कहानी : 3

मित्रों मित्रों में ईर्ष्या

akbar birbal hindi story


लोग कहां करते हैं कि संतान पर माता पिता के खून का बड़ा असर पड़ता है। वह प्रत्यक्ष देखने में भी आया है। बादशाह और दीवान के मैत्री का प्रभाव उनके लड़कों पर भी पड़ा। वे भी आपस में बड़े मित्र हो गए। यहां तक नौबत पहुंची कि वे दोनों अपना सारा कारोबार छोड़कर मैत्री भाव का पालन करने लगे। यह बात बढ़ते हुए बादशाह के कान तक पहुंची। जिस कारण वह बहुत क्रोधित हुआ और उनकी मैत्री भंग करने का उपाय सोचने लगा। उसने इस काम का भार बीरबल को सुप्रत कर दिया। एक दिन वह भरी सभा में दीवान के लड़के को बुलाकर उसने कान में कान से मुंह सटाकर अलग कर दिया। परंतु कहा कुछ भी नहीं। फिर लोगों को सुना कर बोला सावधान इस बात को किसी दूसरे के सामने कदा पि न कहना। दीवान का लड़का वहां से चिडा होकर चुपचाप अपने घर चला गया।

akbar birbal ki kahani in hindi
akbar birbal ki kahani in hindi

जब दोनों मित्र फिर अपने समय पर एकत्रित हुए। तो शहजादे ने पूछा कहीं मित्र! आपके कान से लगकर कल सभा में बीरबल ने क्या कहा था। तब दीवान के लड़के ने उत्तर दिया “मित्रवर उसने मुझसे कहा तो कुछ भी नहीं परंतु झूठ मुठ मेरे कान से मुंह लगाकर हटा दिया। शहजादे ने कहा, “मित्रवर आज यही नई प्रणाली कैसी! आप तो कभी किसी बात की मुझसे छुपा नहीं करते थे। शहजादे के मन में इतने ही से खटका, उत्पन्न हो गया जिससे वह थोड़े समय में ही दीवान के लड़के से अलग हो गया। और फिर कभी उससे मित्रता न की। इधर से दिल का झुकाव हट जाने से उसका मन निजी कारोबार में लग गया। बादशाह ने बीरबल की इस बुद्धिमता से बड़ा प्रसन्न हुआ। और उसे खुश करने के लिए बहुत सा पुरस्कार दिया।

हिंदी कहानी : 4

सच्चाई के मसीहा बीरबल

akbar birbal ki kahani

बादशाह अकबर दरबार में आकर अभी बैठे ही थे, कि तभी दरबार में एक हत्या का मामला आ गया। बादशाह को बड़ा ही बुरा लगा कि आज की शुरुआत हत्या के मामले से ही हो रही है। बादशाह ने हुक्म दिया यह हत्या का मामला है। इसमें जल्दबाजी करना ठीक नहीं होगा। इस मामले की सुनवाई अगले दिन होगी।

akbar birbal ki kahani in hindi
akbar birbal ki kahani

उस अपराधी को मौका

अपराधी को मौका मिल गया। वह दूसरे दिन दरबार लगने से पहले ही बीरबल के घर पर पहुंच गया। और दरबार के लिए तैयार हो रहे बीरबल के आगे गिड़गिड़ाना लगा। “हुजूर आप बुद्धिमानो के बुद्धिमान हैं मैं बड़ी आशा लेकर आपकी शरण में आया हूं। मेरी फांसी की सजा उम्रकैद में तब्दील हो जाएंगी तो मेरे परिजन आपका यह उपकार जीवन भर नहीं भूलेंगे। बीरबल यह सुनकर आवाक रह गए।

वो अपराधी आगे बोला। हुजूर मेरी आपसे प्रार्थना है, कि मेरी तरफ से आप ही बहस करें। बीरबल ने जवाब में कुछ नहीं कहा।

मामला दरबार में पेश हुआ। बादशाह अकबर ने अपराधी को उम्र कैद की सजा सुनाई। अपराधी आश्चर्यचकित फीफा और खुश भी हुआ। धीरे-धीरे चलकर बीरबल के नजदीक आया और बोला, “हुजूर लाख-लाख शुक्रिया आपने मेरी फांसी की सजा उम्रकैद में तबदील करावा दी मैं आपका ताउम्र ऋणी रहूंगा।

यह सुनकर बीरबल बोले, “हां मुझे इस मामले में बड़ी दिक्कत उठानी पड़ी। जहांपनाह तो तुम्हें निर्दोष समझ कर छोड़ने जा रहे थे। मेरे बार-बार समझाने पर उन्होंने तुम्हें उम्र कैद की सजा दी। क्योंकि केवल मुझे पता है। कि तुमने अपराध किया है। और तुमने मेरे घर पर अपना अपराध कबूल भी किया है। हकीकत यही थी अपराधी यह सुनकर हसरत हो रहा था। वह माता-पिता कर रह गया। कि बीरबल के सामने उसने अपना अपराध आखिर कब और क्यों किया।

हिंदी कहानी: 5

आराम से जो मरे वह सुखी


बादशाह अकबर एक दिन बीरबल के साथ सुबह की सैर पर निकले एक नंगे आदमी को देखकर उन्हें गुस्सा आ गया उन्होंने बीरबल से पूछा,” बताओ बीरबल सबसे अधिक सुखी इस दुनिया में कौन है।” मैं तरह-तरह की वेशभूषा में लोगों को जीवन बिताने तथा अनेक प्रकार के भगवानो की पूजा इबादत आदि करते देखकर असमंजस में पड़ गया हूं। बीरबल मुझे मालूम है मेरे सवाल का जवाब केवल तुम ही दे सकते हो।

akbar birbal ki kahani in hindi
akbar birbal ki kahani in hindi

बीरबल बोला हुजूर कोई आदमी कितना सुखी है। या कितना दुखी है। इसका पता तो उसके मरने के बाद ही चल पाता है। बीरबल तुम क्या कहना चाहते हो। हम समझे नहीं शहंशाह अकबर ने कहा।

बीरबल बोले जहांपनाह आज जो आदमी सुखी है। वही कल को मुसीबत में पड़कर दुखी हो जाता है। फिर ऐसे में किसी जिंदा व्यक्ति को कैसे सुखी या दु:खी कहा जा सकता है। यहां अनगिनत ऐसे आदमी है। जो दिखते तो सुखी है। पर उनका दिल दु:खों से भरा पड़ा है। फिर उन्हें सूखी कैसे कहा जा सकता है। हुजूर मेरी राय में तो जो व्यक्ति सुख पूर्वक मरता है। वही सुखी होता है। बीरबल के इस जवाब को सुनकर शहंशाह बहुत प्रसन्न हुए और उनकी तारीफ करने लगे।

हिंदी कहानी : 6

भगवान को भक्तों प्यारा


शहंशाह अकबर ने एक बार बीरबल से सवाल करते हुए कहा,” बीरबल हमने सुना है। कि हाथी की पुकार सुनकरश्री कृष्णा उसकी सहायता करने के लिए नंगे पांव दौड़े चले आए थे। उनके साथ न नौकर थे, ना कोई सिपाही था, ना कोई घोड़ा गाड़ी, बीरबल हमारी समझ में इसका कारण नहीं आता क्या उनके पास नौकर नहीं थे। या नौकरों का अभाव था।

akbar birbal kahani in hindi
akbar birbal kahani in hindi

बीरबल थोड़ा मुस्कुराइए फिर बोले: “जहांपनाह मैं इसका जवाब देने के लिए आपसे कुछ दिनों का समय चाहता
हूं।

कुछ दिनों के बाद बीरबल

कुछ दिनों के बाद बीरबल एक साही नौकर से मिले। जो शहंशाह के पोते की देखभाल करता था। उसी शाही नौकर से इजाजत लेकर बीरबल बादशाह के पोते को एक शिल्पकार के पास ले गए। और उससे कहा कि इस बच्चे की सूरत से मिलता जुलता मॉम का एक पुतला तैयार कर दो। पुतला जब तैयार हो गया तो बीरबल ने पुतले को सही वस्त्र आभूषण उसे सजा दिया फिर उन्होंने मोम के पुतले को उसी नौकर को देते हुए कहा। इस पुतले को रोज की तरह बादशाह के सामने ले जाना और पास के तालाब में फिसल जाने का नाटक करते हुए गिर पड़ना। लेकिन इस बात का अवश्य ध्यान रखना कि पुतला तालाब में गिरे और तुम तालाब के किनारे पर ही गिरना। अगर तुम इस नाटक को करने में सफल हो सफल गए तो तुम्हें ढेरों इनाम मिलेगा।

शाही नौकर ने इनाम के लालच में बीरबल ने जैसा कहा था। वैसा ही किया।वह मोम के पुतलों को लेकर तालाब के पास आया और मोम का पुतला पानी में गिरा कर वह स्वयं भी तालाब के किनारे पर गिर पड़ा।

बादशाह अकबर दूर से

बादशाह अकबर दूर से ही यह सब देखकर कब घबरा गए। और जिस हाल में थे उसी हाल में दौड़ते हुए आए। और तालाब में कूदकर पुतले को लेकर तालाब के बाहर आ गए। हाथ में मोम का पुतला देखकर बादशाह अकबर समझ गए यह बीरबल का ही किया धरा है।

बीरबल ने झट से कहा जहांपनाह इतने नौकर चाकर है। घोड़ा गाड़ी है, सिपाहियों कितनी बड़ी फौज है। फिर भी आप आप स्वयं अकेले ही तालाब में क्यों कूद पड़े। शहंशाह अब कहते भी क्या वह तो आश्चर्य से खड़े रहे।

बीरबल हंसने लगे हुजूर अब तो कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है। जिस तरह से आपको अपना पोता प्यारा है। उसी तरह से भगवान श्री कृष्ण को उनके भक्त प्यारे है। यही कारण है कि वह गजराज की एक पुकार पर पैदल ही दौड़े चले आए थे।

बादशाह अकबर बीरबल के जवाब से संतुष्ट थे। और उन्होंने बीरबल को इनाम देके सुशोभित किया।

हिंदी कहानी : 7

इश्वर का रूप

बादशाह ने एक बार बीरबल से पूछा कि यदि केवल एक ही ईश्वर है| और कोई नहीं है, तो इन सभी देवी-देवताओं का क्या अर्थ है?

बीरबल ने दीवान को एक विशेष पहरे पर खड़े संतरी के पास बुलाया और अपनी पगड़ी की ओर इशारा किया और सम्राट से पूछा कि यह क्या है। अकबर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, पगड़ी!

बीरबल ने संतरी को पगड़ी खोलने के लिए कहा … उसने झिझकते हुए अपनी पगड़ी खोली। बीरबल ने उसे अपनी कमर के चारों ओर बाँधने के लिए कहा, संतरी ने किया। तब बीरबल ने फिर सम्राट से पूछा कि यह क्या है। अकबर ने कहा, करधनी!

बीरबल akbar birbal hindi story

तब बीरबल ने उसे अपने कंधे पर पगड़ी बांधने को कहा और अकबर से पूछा कि यह क्या है? अकबर ने कहा, दुपट्टा।

बीरबल ने हाथ में कपड़ा लिया और पूछा- लेकिन वास्तव में यह क्या है? अकबर ने भी पूछा- क्या है? बीरबल ने कहा, कपड़े पहने।

तब बीरबल ने कहा- इस तरह से भगवान भी एक हैं, लेकिन अपने भक्तों को उनकी भावना के अनुसार अलग-अलग तरह से दिखाई देते हैं।

इस उदाहरण के कारण, अकबर की आँखों में बीरबल का सम्मान बढ़ गया।

हिंदी कहानी : 8

फलोका राजा आम

बादशाह अकबर ने एक दिन सभी दरबारियों के लिए भोजन रखा, उन्हें बीरबल से विशेष प्रेम था इसलिए वह इस पर जोर दे रहे थे। बीरबल खाने से नाराज हो गए इसलिए उन्होंने सम्राट से माफी मांगी और कहा कि “मैं अब और नहीं खा सकता क्योंकि मेरे पेट में जगह नहीं है। मैं आपकी बात नहीं मान सकता।” तभी एक नौकर ने आम को काट लिया और लाया, बीरबल का दिमाग आम को देखकर ललचा गया।

akbar birbal kahani in hindi
akbar birbal kahani in hindi

फलो का राजा आम

बीरबल ने अपना हाथ बढ़ाया और आम के कुछ टुकड़ों को अपने पेट में ले लिया। उसे इस तरह आम खाते हुए देखकर अकबर को गुस्सा आ गया कि जब मैं खाना खिला रहा था, तो उसके पेट में जगह नहीं थी और अब वह कैसे खा रहा है। वह तुरंत गुस्से में चिल्लाया और बीरबल को बुलाया।

बीरबल ने उसके गुस्से का कारण समझा। वह अकबर के सामने खड़ा हो गया और अपने हाथों को पकड़ कर कहा, “जब सड़क पर बहुत भीड़ हो, और चलने के लिए एक पैर रखने के लिए भी पर्याप्त जगह न हो, तो भी अगर आपकी सवारी निकल जाए, तो हर किसी को अपनी जगह बनाकर आपके लिए रास्ता बनाना होगा।” उसी तरह, “आम” सभी फलों पर राज करता है, यह आपकी तरह ही फलों का राजा है, इसलिए इसे देखने से पेट में जगह बनती है।

अकबर उसका जवाब सुनकर खुश हो गया, उसने मीठे आमों की एक टोकरी मंगवाई और एक कीमती उपहार के साथ बीरबल को दे दी। इस मधुर उपहार को पाकर बीरबल बहुत खुश हुए।

akbar birbal ki kahani

हिंदी कहानी : 9

चार मूर्ख


एक दिन मनोरंजन के समय बादशाह के मन में यह बात आई। संसार में मूर्खों की संख्या तो असीमित है। परंतु मैं ऐसे चार मूर्ख देखना चाहता हूं। जिनकी जोड़ के दूसरे ना हो। उस ने बीरबल से कहा,” बीरबल चार मूर्ख इस ढंग के तलाश करो कि जिनकी जोड़ के दूसरे न मिले।” वह बादशाह की आज्ञा मानकर नगर से बाहर निकला। ढूंढने वालों को क्या नहीं मिल सकता केवल सच्ची लगन होनी चाहिए। कुछ दूर जाकर बीरबल को एक आदमी दिखाई पड़ा जो थाली में पान का एक जुड़ा और मिठाई लिए हुए बड़े उत्साह से नगर की तरफ जल्दी से भागा जा रहा था।

akbar birbal kahani in hindi
akbar birbal kahani in hindi

बीरबल ने उस आदमी से पूछा,” क्यों साहब यह सब सामान कहां लिए जा रहे हो। की आपका पैर खुशी के कारण जमीन पर नहीं पड़ता।” आप के मर्म को जानने की मुझे बड़ी इच्छा है। एवं थोड़ा कष्ट कर बतलाइए।। उस आदमी ने पहले तो इस ख्याल से कुछ ही बताया नहीं उचित समय पर पहुंचने के लिए। परंतु जब बीरबल ने उसे छेड़कर कई बार पूछा! तो वह मटक कर बोला यद्यपि मुझे विलंब हो रहा है। परंतु आपको इतना आग्रह करने पर बता देना भी जरूरी है। मेरी औरत ने एक दूसरा पति कर लिया है उससे उसे लड़का पैदा हुआ है। आज बरसी है मैं उसी का बधावा लिए हुए न्योता में जा रहा हूं।

अकबर बीरबल ने उसे अपना नाम बतला

बीरबल ने उसे अपना नाम बतला कर रोक लिया और बोला तूने मेरे साथ साथ बादशाह के पास चलना पड़ेगा। जब मैं छुट्टी दूंगा तब जाना वह बीरबल का नाम सुनकर डर गया। और लाचार होकर उनके साथ ही चला वह उसको साथ में लेकर आगे बढ़ा। वियोग से रास्ते में एक घोड़ी सवार मिला। वह तो घोड़ी पर सवार था परंतु अपने सिर पर घास का पूरा को रखा हुआ था। बीरबल ने उससे पूछा क्यों भाई यह क्या मामला है। आप अपने सिर का वजन घोड़ी पर लादकर क्यों नहीं ले जाते। उसने कहा गरीब इसका कारण यह है। कि मेरी घोड़ी गाभिन है। ऐसी दशा में उस पर इतना बोझ नहीं लादा जा सकता। मुझे ले जा रही है। यही क्या कम गनीमत है।

बीरबल घोड़ी सवार को भी अपने साथ ले लिया और दोनों को लिए दिए बादशाह के पास पहुंचा। तब बीरबल बोला पृथ्वीनाथ चारों मूर्ख आपके सामने उपस्थित है। बादशाह तो दो को ही देख रहा था। एवं बोला तीसरा मुर्ख कहां है। बीरबल! ने कहा तीसरा नंबर हुजूर आप का है। जो आपके ऐसे दो मूर्खों के देखने की इच्छा होती है। चौथा मूर्ख में हूं जो उन्हें ढूंढ कर आपके पास लाता हूं। बादशाह को बीरबल के ऐसे उत्तर से बड़ी प्रसन्नता हुई। और जब उन्हें उनकी मूर्खता का परिचय मिला तो खिलखिला कर हंस पड़े।

हिंदी कहानी : 10

अधिकतर प्रिय क्या है?


एक दिन बादशाह अपने दरबार में बैठा था। और दो वर्षीय शहजादा सलीम उसकी गोद में आनंद से खेल रहा था।
उसकी बाल चपलता देखकर बादशाह आनंद मगन हो गया। और आनंद कानन में उसके मन में यह प्रश्न उपस्थित
हुआ। जीवधारी को अधिकतर प्रिय क्या है? बादशाह को चुप देखकर सलीम उसका ध्यान अपनी तरफ आकर्शित
करने के लिए प्रेरित करने के अभिप्राय से तुलना कर कुछ बोला उसकी बातों ने बादशाह के आनंद को और भी बढ़ा
दिया। आनंद बस वह अपने मनोगत भावों को दबा ना सका और तत्क्षण समस्त दरबारियों की तरफ लक्ष्य करके
पूछा इस पृथ्वी पर के प्राणियों को अधिकतर प्रिय क्या है?।

akbar birbal hindi story
akbar birbal hindi story

akbar birbal ki kahani

दरबारी सोच में पड़ गए। कोई कुछ कहता तो कोई कुछ, अंत में आपस में गोष्ठी करने लगे परंतु फिर भी किसी सिद्धांत पर अटल नहीं हुए। बीरबल की अनुपस्थिति मैं इन विचारों पर कभी बे जैसी भी तर्क आया करता था। यदि बीरबल प्रस्तुत होता तब तो उनका वह कारण था। बच्चा भी बीरबल के रहते ऐसी बातें किसी दूसरे दरबारी से कभी ना पूछता! आज की सभा में बीरबल न था जिस कारण इसके ऊपर ऐसी आफत आई कुछ देर सोच समझ लेने के बाद सर्वसम्मति मिलाकर एक वृध्ध दरबारी बोला पृथ्वीनाथ ‘अधिकतर प्रिय लड़का होता है।” दरबारियों ने आपस की गोष्टी से निश्चित कर लिया कि इस समय बादशाह लड़के को गोद में लिए हुए खेला रहा है। अतः एवं उसके प्रश्न का इशारा लड़के की तरफ ही है। बादशाह उस समय वृध्ध दरबार का उत्तर स्वीकार कर लिया और सभा बर्खास्त हुई।

बीरबल राजकीय कार्य

बीरबल राजकीय कार्य से कहीं बाहर गया था। और दूसरे ही दिन आ पहुंचा। बीरबल को सभा में बैठते ही वही प्रश्न उससे भी किया। वह बोला गरीब परवर प्राणी को अपना जीव सबसे अधिक प्यारा होता है। इसकी तुलना और किसी से नहीं की जा सकती। चाहे वह अपना कितना ही सगा संबंधी क्यों ना हो। तब बादशाह अपने दरबारियों का सम्मान रखने के लिए बीरबल की बात काट कर कहा। “तुम्हारा कहना गलत है क्या लड़का प्राण से प्यारा नहीं होता?।

तुमको यदि अपने कहने पर अटल विश्वास है। तो उसे प्रमाणित कर दिखाओ” बीरबल बादशाह की आज्ञा शिरोधार्य करता हुआ बोला,” पृथ्वीनाथ बाग का एक बड़ा पानी का ओझ खाली करने की बागवान को अनुमति दी जाए। तब तक मैं बाजार से परीक्षा की चीजें लेकर लौट आता हूं। आप सभासदों सहित बाग में उपस्थित रहे। वहीं पर मैं इस बात को प्रमाणित करके दिखलाऊंगा।

बादशाह की याग्या पाकर बागवान ने प्राण प्राण से परिश्रम करके थोड़ी ही देर में सबसे बड़े होज को खाली कर सूचना दी। बाग में बैठने के लिए बादशाह की तरफ से समुचित प्रबंध किया गया। और वे दरबारियों सहित बाग में दाखिल हुए। तब तक बीरबल भी एक बंदरिया को उसके बच्चे सहित लेकर बाग में आया। बीरबल ने दरबारियों बंदरिया को बच्चे सहित हौज के मध्य भाग में बिठाकर ऊपर से पानी भरने की आग्या दी। ओझ में पानी भरा जाने लगा पानी क्रमश ओझ के ऊपर चढ़ ता गया तब तब बंदरिया आपने बच्चे को उचा उठती गई|

और पानी का बढ़ना बराबर जारी


रहा। जब पानी बढ़ कर उसके मुह तक पहुंचा तो वह खड़ी हो गई। और अपने बच्चे को अपने हाथ पर रखकर ऊपर उठा लिया। सब लोग इस नजारे को बड़ी गौर से देख रहे थे। बादशाह बीरबल को चिंता कर बोला शहंशाह:बीरबल क्या देखते नहीं हो। कि ये बंदरिया अपने प्राणों पर खेलकर बच्चे को बचा रही है। क्या अभी पुत्र को सर्वोपरि मानने को तैयार नहीं हो। बीरबल ने उत्तर दिया पृथ्वीनाथ थोड़ा और ठहर जा अभी बंदरिया के प्राण प्राण पर नहीं आई है। थोड़ी देर में अपने आप ही फैसला हो जाएगा।

अभी बीरबल और बादशाह

अभी बीरबल और बादशाह में उपरोक्त बातें हो रही थी। कि बंदरिया के मुख में पानी भरना शुरू हुआ। पानी भरने के कारण उसका दम घुटने की नौबत आ गई। नाक में पानी भरने लगा, वह अधीर होकर बहने लगी। आखिरकार लाचार हो उसने बच्चे की ममता छोड़ दी। और अपना प्राण बचाने के लिए एक नया उपाय निकाला। बच्चे को पानी में डूबा कर अब स्वयं उसके ऊपर खड़ी हो गई। इस प्रकार उसका मुंह पानी से ऊपर हो गया। बीरबल ने बादशाह को उसे दिखलाकर बागवान को पानी रोकने की यागना दी पानी आना तुरंत बंद हो गया। और बंदरिया बच्चे सहित सजीव बाहर निकाल ली गई।

बीरबल ने कहा:शहंशाह आपने देखा है। कि जब तक प्राण बचने की आशा थी तब तक बंदरिया बच्चे का प्राण बचाने की पूरी कौशिस करती रही। परंतु जब उसके ही प्राणों पर आफत आई। तब वह बच्चे की जीवन रक्षा भूल गई। बल्कि स्वयं उसके जान की ग्राहक होकर अपना प्राण बचाया। बादशाह दरबारियों सहित बीरबल के बुद्धि की श्रेष्ठता स्वीकार कर ली। और बहोत प्रसन्न हुए।

akbar birbal ki kahani

इसे भी पढ़े : तोता कहानी in हिंदी

0 thoughts on “best 10 akbar birbal ki kahani”

Leave a Comment