चतुर बंदर, bandar ki kahani

चतुर बंदर

 bandar ki kahani : एक चालाक बंदर था । वह अपने गुट में सबसे शक्तिशाली था। एक दिन वह नदी किनारे उछल कूद कर रहा था तभी उसे नदी में एक टापू दिखाई दिया ।  वह नदी में पड़ी चट्टान के ऊपर कूदा और दूसरी ही छलांग में चट्टान से कूद कर टापू पर पहुंच गया ।

bandar ki kahani
bandar aur magarmach ki kahani

 टापू में बहुत सुंदर बगीचा था । जिसमें आम और जामुन के साथ-साथ और भी बहुत सारे फलों के पेड़ थे । उसे वह बगीचा बहुत पसंद आया । उसने निश्चय किया कि अब वह रोज यहां आकर अपनी भूख शांत करेगा ।

 इस तरह वह रोज उस टॉपिक पर जाने लगा । वह दिनभर खाता पीता,  खेलता और शाम को अपने घर लौट आता । उस नदी में एक मगरमच्छ अपने परिवार के साथ रहता था । उस मगरमच्छ की पत्नी बंदर को आते जाते देखा करती थी ।

 बंदर को देखकर वह सोचती थी की, ”  यह रोज मीठे मीठे ताजे फल खाता है,  इसका दिल भी जरूर इतना ही मीठा होगा ।”  यह सोचकर उसने मगरमच्छ से कहा- ” प्रिय ! मैं इस बंदर का ‘दिल‘ खाना चाहती हूं ।”

 मगरमच्छ ने कहा- ”  बहुत अच्छा ! 

मैं बंदर को पकड़ने का उपाय करता हूं ।”  उसने सोचा, ” मैं चट्टान के पीछे छिप  जाता हूं । जैसे ही बंदर चट्टान पर कुदेगा, मैं उसे पकड़ लूंगा । ”   बंदर फल खाकर टापू से वापस आने के लिए,  जैसे ही चट्टान पर कूदने लगा,  वैसे ही उसे लगा की चट्टान कुछ ऊंची कैसे हो गई है,  जबकि पानी भी कम नहीं हुआ था । उसने सोचा, ”  क्या कहीं कोई मुझे पकड़ने के लिए छुपा तो नहीं है?  कहीं वह मगरमच्छ तो नहीं है? “

 उसने चतुराई से काम किया और आवाज लगाई – ”   ओ चट्टान ! ओ चट्टान ! ”  उसको कोई भी जवाब नहीं मिला । वह दुबारा चिल्लाया  – ” ओ चट्टान !  क्या आज तुम मुझसे बात नहीं करोगी? ”  मगरमच्छ ने सोचा, ”  बंदर शायद रोज चट्टान से बात करता होगा । चट्टानों उसे जवाब देती होंगी ।” वह आवाज बदल कर बोला-”  हे बंदर तुम क्या चाहते हो? “

 बंदर समझ गया और बोला-” तुम कौन हो?”

  आवाज आई-” मैं मगरमच्छ हूं ।”

 बंदर ने कहा- ” तुमने पहले झूठ क्यों बोला? तुम क्या चाहते हो? “

 मगर ने कहा- ”  मेरी पत्नी तुम्हारा दिल खाना चाहती है । तुम्हें मारकर, में तुम्हारा दिल निकालना चाहता हूं।”   बंदर ने सोचा कि टापू से बाहर निकलने को कोई रास्ता नहीं है और यह मगरमच्छ मुझे मारना चाहता है। मुझे इससे बचकर यहां से निकलने का कोई उपाय करना चाहिए ।

बंदर ने उससे कहा- ”  ओ प्यारे मगरमच्छ!  मैं खुद को तुम्हें सोचता हूं । अपना मुंह खोलो।”

बंदर के कहने पर उसने अपना पूरा मुंह खोल लिया और यह भूल गया कि ऐसा करने पर उसकी आंखें बंद हो जाएंगी । वह कुछ भी नहीं देख पाएगा ।

बंदर उसके सिर पर कूदा और दूसरी ही  छलांग में किनारे पर पहुंच गया ।

 मगरमच्छ को अपनी गलती समझ में आ गई । वह बंदर की बुद्धिमानी की प्रशंसा करते हुए बोला- ”  बंदर राजा । चार अच्छाइयां अब सभी में होनी चाहिए,  जो कि तुम में  है। जैसे सच्चाई, सोचने की शक्ति, मेहनत से कम करना और आत्म-त्याग।  तुमने कहा, मै तुम्हारे पास आऊंगा।  यह तुम्हारी सच्चाई थी की तुम मेरे पास आये । 

 तुमने कहा मुंह खोलो, यह तुम्हारी सोचने की शक्ति थी इस प्रकार मेरी आंखें बंद हो जाएंगी और मैं तुम्हें देख ही नहीं पाऊंगा । तुम्हारी मेहनत से काम करने की इच्छा थी । तुम चमकती बिजली के समान मुझ पर कुद कर उस पर चले गए।  तुम में आत्म त्याग की भावना थी,  अगर तुम ठीक से मेरे सिर पर नहीं  कूद पाते तो मर भी सकते थे । तुम बहुत ही चतुर और शक्तिशाली हो । यह मेरी गलती थी कि मैंने तुम्हें मारना चाहा!”

 यह कह कर मगरमच्छ पानी में चला गया ।

 शिक्षा:  मुसीबत के वक्त हमें हिम्मत नहीं हारना चाहिए बल्कि बुद्धि और संयम से काम लेना चाहिए ।

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