हेलमेट hindi कहानी

helmet ki kahani

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लेखक; डॉ.कांति लाल यादव

helmet ki hindi kahani

अमर ने नई-नई बाइक खरीदी। बाइक स्टाइलिस्ट व् नामी कंपनी की थी। बाइक पर सवार होकर अमर व् उसकी पत्नी आशा कोलिनी में घूमने निकले । कोलोनी के ७० वर्षीय प्रताप दादा ने अमर को नई गाड़ी के साथ देखकर कहा-“बेटे बाइक तो बहोत शानदार है पर तुम अधूरे लग रहे हो। एक चीज की कमी है।“ अमर सोच में पड़ गया। बाइक नई है। नई-नवेली पत्नी शाथ में है। फिर अधूरापन क्या हो सकता है! पलट कर अमर बोला-“ दादाजी क्या कमी है?” दादाजी बोले-“यह खुद से ही पहचान करो!”अमर ने अपनी पत्नी को बार बार पूछा की बाइक नई है और सबकुछ ठीक है तो हम में अधूरापन क्या होगा ।

पत्नी बोली-“इसका उत्तर में आपको तिन दिन बाद दूंगी।“ तिन दिन बाद अमर का जन्मदिन था। अमर की पत्नी आशा अपनी सहेली के साथ बाजार जा कर एक अच्छी कंपनी का मजबूत हेलमेट खरीदकर सुन्दर कवर में पेक कर, सजाकर गिफ्ट के रूप में ले आई। अमर के बर्थडे पर आशा ने अमर के मित्रो के बिच में बर्थडे गिफ्ट दिया। सबकी निगाह गिफ्ट पर थी की गिफ्ट में क्या हो सकता है? जब गिफ्ट पेकिंग को हटाया गया तो अन्दर से हेलमेट निकला। तब सभी दोस्त हस पड़े। गिफ्ट अमर को अजीब सा लगा। अमर को इतना अच्छा नहीं लगा जितना वह समझ रहा था। कुछ मित्रो कहने लगे अरे वाह! भाई नई बाइक का ऑफर है। कुछ लोग कहेने लगे की भाभीजी की सोच सराहनीय है। तो कुछ लोग मन ही मन कहेने लगे-“क्या बेकार तोहफा दिया है।“

चार दिन बाद वाही हेलमेट को पहनकर अमर ऑफिस के लिए निकला। सड़क निर्माण का कार्य चल रहा था। और उन्हें विपरीत मार्ग से चलने के निर्देश दिए गए तभी लापरवाही से चलाते हुए एक गाड़ी ने अमर को टक्कर मार दी। अमर को हाथ पैर में गंभीर चोटे आई। मजबूत और नए हेलमेट पर खरोच आई किन्तु अमर का सर जख्मी होने से बच गया। वर्ना मौत हो सकती थी। आस-पास हुई भीड़ में से कुछ मददगार निकले और अमर को अस्पताल में भारती करा कर घर वालो को सूचित किया तब रोती-भागती आशा ने अमर को सही सलामत पाकर संतोष की सास ली। आशा एक नै जिंदगी जैशा अनुभव कर रही थी। अमर को आशा के द्वारा दिया हुआ तोहफा अनमोल लग रहा था। और प्रताप दादा का उत्तर भी मिल गया था।

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