moral short story in hindi, शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

Contents show

moral short story in hindi:- नमस्कार दोस्तो मैन जो आपके लिए यह moral story लिखी है मैं उम्मीद करता हूँ की आपको पसंद आये, यह moral stories आपके बच्चो को कोई ना कोई सिख जरूर देगी, जो आगे चलके काम आएगा moral story in hindi

moral short story in hindi,शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी

"<yoastmark

 

moral story in hindi in short

सोनू की परीक्षा
• मोनू राजा से बना रंक
• सोनू का अहंकार चकना चूर
• भिखारी और भगवान
• बदसूरत हंस
• शेर और लकड़हारा
• चिंटू और बिल्ली
• हिरण और शेर
• मेंढक और पहाड़ की चोटी
• बेटे ने पिता को सबक सिखाई
• आम और निम
• मुर्गा और गांव वाले
• चूहे की मनमानी
• जन्मदिन
• चिंटू का झूठ
• आदमी और शेर
• शेर और समझदार हिरन
• दूधवाला
• आलसी बकरी
• मोनू बना सफल वयक्ति
• खीर किसने खाया
• चल्हाख हिरन
• हिरन और लोमड़ी
• मुन्नू और दादाजी
• सोनू फस गया
• सरारती चुन्नू


(1) सोनू की परीक्षा motivational moral story in hindi


सोनू नामका एक लड़का एक लड़का था सोनू कभी भी किसी बात को सीरियस नही लेता था वह हर बात को मजाक बनाके रखता और वह कभी भी समय का पालन नही करता था।

सोनू हमेसा अपनी कक्षा में लेट जाते कभी भी समय पर नही जाता जिसकी वजह से उसे क्लास के टीचर क्लास क्व बाहर ही खड़ा रखते कई कई बार तो उसे स्कूल से ही बाहर कर देते।

इतना जिल्लत होने के बाद भी विकास ने लेट आना नही छोड़ा और उसकी पढ़ाई नही हो पति थी क्लास के टीचर जो सिखाते वह सब सोनू को मालूम नही था।

सोनू अपनी मौज मस्ती में रहता इसी तरह करते करते सोनू की परीक्षा नजदीक आगई और सोनू फिर भी कुछ टेंसन नही था वह अपने दोस्तो को बोलता अरे भाई फिक्र मत करो मैं घर पर पढ़ाई कर लूंगा।

सोनू घर पे जाने के बाद वीडियो गेम खेलता और खाना खाकर सो जाता सोनू की अगेले दिन परीक्षा आती है वह किताब लेकर बैठता है लेकीन उसे कुछ समझ मव नही आता है।

की वह इस किताब में से क्या पढ़े क्यूंकि उसने पूरे साल में एक भी बार कक्षा में नही बैठा और घर बैठकर भी पढ़ाई नही की।

सोनू को अपनी गलती का एैहेसास हुआ की काश वह समय पर स्कूल जा पता और समय पर रोज घर बैठकर पढ़ पता तो आज एैसी नौबत नहीं आती।

सोनू इस परीक्षा में फेल होगया लेकीन उसे अपनी गलती का एैहेसास होगया अब सोनू रोज समय पर स्कूल जाता और घर बैठकर भी पढ़ाई करता।

(2) मोनू राजा से बना रंक moral stories in hindi for child


मोनू नामक एक लड़का था उसके पापा बहुत अमीर थे वह कभी भी काम नही करता था, और उसके घर में जो भी वस्तुएं रहती उनकी वह इज्जत नही करता।

मोनू के पास काफी पैसा था इसलिए कभी उसे पैसे की भी जरूरत महसूस नही है, मोनू जो भी मांगता उसके पाप उसे लेकर दे देते।

मोनू के पापा को एक दिन बिजनेस में बहुत बड़ा नुकसान हुआ और वह गरीब होगये और वह एक छोटे से मकान में रहने लगे किराया देकर।

मोनू को उन चिझो की ऐहिमियात मालूम पड़ी जिनकी वह कभी इज्जत नही करता उसे मालूम पड़ा की मैं पैसे के बिना कुछ नही लेकीन अभी वह कर भी क्या सकता था, अब तो उसके हाँथ से सब कुछ चला गया था।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की जो चिझे हमारे पास होती है उनकी एैहिमियात हमे कभी भी मालूम नही पड़ती है उन चिझो के जाने के बाद उनकी हमे एैहिमियात का पता चलता है, इसलिए हमे हर चिझे की इज्जत करनी चाहिए।

(3) सोनू का अहंकार चकना चूर moral story in hindi with picture


एक सोनू नामक लड़का था सोनू के पापा का आये दिन किसी अखबार में फ़ोटो छपता था, उनका कई बार टीवी के ऊपर इंटरवी आ चुका था।

सोनू हर किसी को बोलता मैं जगदीश मोहन का बीटा हूँ जिनकी फ़ोटो हमेसा अखबार में छपति रहती है वह बहुत बड़े इंसान है मेरे पापा के पास बहुत पैसा है, मेरे पापा टीवी पर भी आते हैं।

इस बात का सोनू को घमंड होगया था, वह कहिं भी जाता तो अपने पापा का रुआब दिखाकर सबको डरता और धमकाता था।

एक दिन सोनू एक होटल में चाय पीने गया एक वेटर से गलती से उसके पेंट के ऊपर पानी गिर गया सोनू उसके ऊपर चिल्ल्या और उसे एक थप्पड़ भी मार।

और बोला तुम जानते हो मैं कौन हूँ मैं इनका बीटा हूँ, वेटर ने बोला मैं तुम्हारे पापा को जनता हूँ लेकीन तुम्हे नही तुमने ऐसा कौनसा काम किया है जिससे मैं तुम्हे जानू।

तुम अपने पापा के पैसों के ऊपर निर्भर रहते हो, तुम्हारी खुद की क्या पहचान है, मेरी खुद की एक पहचान है मैं तुम्हारी तरह दूसरे के पैसों के ऊपर निर्भर नही हूँ, मैं मेहनत करता हूँ और अपने पैसों की खाता हूँ।

सोनी वहां से चुप चाप चला गया और घर जेक सोचने लगा की यह बात तो सही है मेरी कुछ पहचान नही है फिर सोनू ने निश्चय कर लिया की मैं आज के बाद अपनी खुद की पहचान बनाऊंगा ।

सिख:- इस कहानी से हमें यह सिख मिलती है की, हमे कभी भी अपने पिता के पैसों और नाम के ऊपर नही उछलना चाहिए यह उनका नाम और उनकी मेहनत है हमारी नही।

इसलिए हमे खुद कुछ करना चाहिए पिता के पैसों से अपनी जरूरत पूरी होती है ना की अपनी ख़्वाईसे अपनी ख़्वाईसे के लिए हमे खुद मेहनत करनी पड़ती है।

(4) भिखारी और भगवान top 10 moral story in hindi


बहुत समय पहले की बात है एक भिखारी लोगो के घर घर घुमके भीख मंगता था फटे पुराने कपड़े पहनकर उसकी हालत पे दया खाकर भी लोग भीख दे देते थे।

भिखारी जो भीख मांग के लाता वह शाम को उनको खा लेता था भिखारी इसी तरह अपना जीवन व्यतीत करता था लेकीन वह भगवान को हमेसा कोसता रहता की भगवान मैं यह तुम्हारी वजह से बना हूँ।

तुमने ही मुझे ऐसा बनाया है तुमगर चाहते तो मुझे किसी पैसे वाले के घर में पैदा कर सकते थे लेकीन तुमने मुझे गरीब घर में पैदा किया और मैं गरीब बाना रहा।

और अब इतनी गरीबी आचुकि है की मुझे भीख मांग के खान पैड रहा है, एक दिन उसकी उस भिखारी की रोज रोज की यह बाते सुनकर प्रकट हुए और बोले।

मैन तुम्हे गरीब घर में भेजा मानता हूँ यह मेरी गलती है लेकीन तुमने उस गरीब घर में भी गरीब बनकर रहे तुम सफल होने के लिए कुछ मेहनत नही किये यह मेरी गलती नही है।

तुम अगर मेहनत करते तो आज भिखारी नही होते तुम्हे दर-दर भीख नही मांगना पड़ता इसलिए अपनी गलती के लिए मुझे हर बार दोष मत दो यह कहकर भगवान वहाँ से चले गए।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की, भगवान ने भले ही हमे गरीब घर में पैदा किया हो लेकीन अगर हम गरीब बनकर ही रहे तो वह भगवान की गलती नही है, वह हमारी गलती है।

(5) बदसूरत हंस ugly face moral stories in hindi


बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में 5 हंस भाई रहते थे, उन पांच हंसो में से 4 हंस गोर और दिखने में आकर्षक थे उनमे से सिर्फ एक हंस कला और दिखने में बदसूरत था।

चारो भाई उस हंस से दूर रहते थे उसके पास नही जाते थे, उसको अपने साथ खेलने में नही लेते थे, उस हंस को बुरा लगता वह हंस अपने भाइयो से और उस जंगल से कहीं दूर चला गया।

लेकीन दूर जाने के बाद भी उसका वही हाल था उसका कोई दोस्त नही सब उसके रूप का मजक उड़ाते और उससे दूर भागते।

अब तो हंस लोगो के सामने जाने से भी डरता था की लोग उसका मजक कहीं उसका मजाक न उड़ाए और बेइज्जत ना करे।

एक बार हंस पानी के अंदर खड़ा था और वहां से एक हंसो की टोली गुजर रही थी उन हंसो की टोली ने भी उस हंस का मजक उड़ाया।

जब उन्होंने उस हंस का मजक उड़ाया तो उस हंस ने उन्हें जवाब दिया आपका बहुत बहुत सक्रिय मेरी इतनी बड़ाई करने के लिए सुक्र है आपने मेरी इस सुंदरता के तरफ ध्यान तो दिया।

हंसो की टोली वहाँ से अपमानित होने के बाद चुप चाप चली गई अब हंस को मालूम पैड गया था की उसे क्या कहना है जब कोई उसके रूप के ऊपर बुराई करता है तो।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की, अगर हम दुसरो से डर के जितना भागेंगे उतना ही, लोग हमे डराएंगे इसलिए हमें उस डर का सामना करना चाहिये ना की उससे दूर भगना चाहिए।

(6) शेर और लकड़हारा lion moral storIes in hindi


बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक लकड़हारा पेड़ कटरहा था तभी उसे एक जख्मी शेर दिखाई दिया किसी सीकरी ने शेर के पैर में गोली मेरी थी इसके वजह से शेर जख्मी होगया था।

शेर दर्द के कारण चिल्ला और रो रहा था, लकड़हारा देखने गया लकड़हारे ने देखा की शेर के पैर में गोली लगी है और उसके पैर में से ढेर सारा खून गिर रहा है।

लकड़हारा उसकी मदत करना चाहता था लेकीन उसे डर भी लग रहा था की शेर कहीं उसे हानि ना पहुंचाए लकड़हारे ने फिर सोच जो होग देखा जाएगा पहले इसकी मदत करते हैं, मैं अपनी इंसानियत नही छोड़ सकता।

लकड़हारे ने शेर के पैर में से गोली निकली और उसके घाव पर पत्तियों का लेप लगके उसे एक कपड़े से बांध दिया तभी शेर अचानक एक देवी रूप धारण कर लेता है।

वह देवी उस लकड़हारे से कहती है, व्दस आजकल के जमने में कोई इंसान एक दूसरे इंसान की मदत नही करताहै तुमने एक शेर की मदत की यह जानते हुये की वह तुम्हे नुकसान पहुंचा सकता है।

लकड़हारा बोला देवी मैन कोई बड़ा काम नही किया है मैन सिर्फ अपना इंसानियत का धर्म निभाया है, देवी बोली अगर तुम्हारे जैसी सोच हर किसी की होने लगी तो इस पृथ्वी से पाप का नाश ही हो जायेगा।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे अपना इंसानियत धर्म हमेसा निभाना चाहिए क्या पता हमारी वजह से किसकी जान बच जाए।

आजकल के लोग जख्मी इंसान को देखकर उसकी मदत करने की बजाय उससे दूर भागते हैं, अगर हम उस जख्मी इंसान की मदत कर देंगे तो हमारा कुछ नही जाएगा।

उल्टा हेम उसके परिवार और उसकी तरफ से दुआ मिलेगी वह कहते हैं न अगर सौ पाप भी किया हो तो एक पूण्य का काम जरूर करना चाहिए हमारे वह सौ पाप भी धूल जाते हैं।

(7) चिंटू और बिल्ली Cat moral stories in hindi


short moral story for kids

एक गांव में चिंटू और उसकी माँ एक छोटी से झोपड़ी में रहते थी चिंटू की माँ टोकरी बनाकर बाजार में बेचती थी इस तरह से चिंटू और उसकी माँ का गुजरा होता था।

चिंटू भी अपनी माँ का काम में हाँथ बटाता था चिंटू दयालु हर्दय का था वह किस को भी मुसिब्बत में नही देकह सकता था।

चिंटू हर किसी की मदत करता एक दिन चिंटू टोकरी को बेचने के लिए बाजार जा रहा था तभी उसे रास्ते में एक कुएं से किसी जानवर की चिल्लाने की आवाज आई।

चिंटू ने जब उस कुएं के पास जाकर देखा तो उसे उस कुएं के अंदर एक बिल्ली दिखाई दी वह बिल्ली उस कुएं के अंदर डुब रही थी।

चिंटू ने उसे बचाने क्व लिए वह अपने घर से रस्सी लेकर आया और अपने एक टोकरी में रस्सी को बांधकर कुएं के अंदर बिल्ली के सामने फेक दिया।

बिल्ली उस टोकरी के अंदर बैठ गई और चिंटू ने रस्सी को खीचना सुरु किया और बिल्ली को कुएं के अंदर बाहर निकल बिल्ली ने उसका सक्रिय अदा किया और वहां से चली गई।

अगले दिन चिंटू टोकरी लेकर अपने रास्ते से जा रहा था, तभी चिंटू क्व ऊपर कुछ बिल्लियों के झुंड ने हमला किया चिंटू उन्हें देखकर डर गया।

उन बिल्लियों में वह भी बिल्ली थी जिसकी जान कल चिंटू ने बचाई थी उस बिल्ली ने जब उसे देखा तो वह चिंटू को पहचान गई, और अपने साथियों को बोला की यह वही आदमी है जिसने कल मेरी जान बचाई थी।

इसे मत मारो सारी बिल्लियों ने उसकी बात सुन ली और उन्होंने चिंटू को कोई नुकसान नही पहुंचाया और वहां से चलि गई।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हम जैसा काम करेंगे हमे उसके हिसाब से ही फल मिलता है, अगर हम बुरा करेंगे तो हमारे साथ बुरा होगा और अगर हम अच्छा करेंगे तो हमारे साथ अच्छा होगा।

(8) हिरण और शेर lion and deer moral story in hindi


moral short story in hindi

बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में हिरन रहती थी उसी जंगल में एक शेर भी रहता था शेर बहुत ही ताकतवर था और हिरन कमजोर।

शेर की नजर हमेसा से उस हिरन को खाने के इरादे से देखती थी, लेकीन हिरन को उसके आने की खबर पहले ही मालूम पड़ जाती और हिरन वहाँ से गायब हो जाती।

एक दिन हिरन घास चर रही थी इस बात ने अंजान की उसके अस पास कोई नही है, लेकीन ऐसा नही था हिरन को इस बार शेर की आने की भनक नही पड़ी थी।

इसलिए हिरन बेखौफ से अपना घास चर रही थी, लेकीन तभी वहां पे शेर आगया उसने देखा हिरन अकेली है और घास चर रही है।

शेर उस हिरन के पास जा धबका और हिरन से कहा अब कहां जाएगी इतने दिनों से मैं इसी मौके के तलाश में था आज तू मिली है मैं तुझे नही छोडूंगा।

हिरन वहां से भगना चालू करती है, शेर भी उसके पीछे पीछे भगत है, शेर बोलता है अरे तू कितनी भी भाग ले मैं तुझे कैसे भी पकड़ लूंगा मैं तेरे से ज्यादा ताकतवर हूँ।

हिरन फिर एक छोटे से गुफा में घुस गई जिसका रास्ता बहुत ही छोटा था इतना की सिर्फ उसके अंदर हिरन ही घुस सकती थी।

शेर ने उस गुफा के अंदर घुसने का बहुत प्रयास किया लेकीन सफल नही रहा वह बहुत देर तक उस गुफा के पास बैठा रहा ताकि हिरन गुफा से बाहर निकले लेकीन ऐसा नही हुआ।

शेर के रहते हुए हिरन उस गुफा से बाहर नही निकली उसने शेर के जाने का इंतिजार किया जब शेर वहाँ से चला गया तब हिरन गुफा से बाहर निकली और चली गई।

इन्हें भी पढ़े: bal kahani hindi mai – बच्चो के लिए कहानिया

(9) मेंढक और पहाड़ की चोटी motivational moral stories in hindi


एक दिन की बात है कुछ मेंढक में एक शर्त लगी थी की इस सबसे बड़े पहाड़ की चोटी के ऊपर कौन चढ़ता है, बहुत से मेंढक ने इसमें हिस्सा लिया।

और उन मेंढकों को चढ़ता देखने के लिए कई सारे जानवर आये थे, मेंढकों ने उस पहाड़ में चढ़ना सुरु किया वह चढ़ते ही जा रहे थे।

कुछ जानवर बिलने लगे अरे तुमसे नही हो पायेगा तुम फुदकने के सिवाय क्या कर सकते हो यह तुम्हारे बस की बात नही है, यह बात सुनकर एक मेंढक का पैर फिसल और वह गिर गया।

बाद में दूसरा और ऐसे करके सारे मेंढक धीरे-धीरे उस पहाड़ पे से गिरने लगे सिवाय एक मेंढक के वह मेंढक उन जनवरो की बातों को ना सुनकर सिर्फ अपने मंजिल पे पहुंचने का लक्ष्य रखा था।

जनवरो ने उसे बहुत बोला अरे तेरे से नही हो पायेगा जहाँ सब मेंढक गिर गए वहाँ तू क्या कर लेगा छोड़ दे चढ़ना लेकीन वह मेंढक एक ना सुनता।

वह चढ़ता ही चला गया और वह मेंढक उस पहाड़ की छोटी पर जा पहुंचा बाद में सारे जनवरो और मेंढकों को मालूम पड़ा की जो पहाड़ की चोटी पर पहुंचा वह एक बहरा ( कान से ना सुनाई देना ) मेढक था।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे कभी भी अपने लक्ष्य से विचलित नही होना चाहिए चाहे कितने भी लोग हमारे मंजिल के बीच में रुकावट क्यूँ न बने।

अगर वह मेंढक बहरा नही होता तो शायद वह भी उन दूसरे मेंढकों के साथ साथ नीचे गिर जाता लेकीन बहरा होने के वजह से जो भी जानवर बोलते उसके पल्ले नही पड़ता और लोगो की बातो में नही आया और अपनी मंजिल में विचलित नही हुआ।

(10) बेटे ने पिता को सबक सिखाई guilty moral stories in hindi


शॉर्ट स्टोरी फॉर किड्स

एक समय की बात है एक आदमी अपने पिता को वृदधा आश्रम में छोड़ने जा रहा था उस आदमी के साथ उसका एक छोटा सा लड़का था।

उस लड़के ने अपने पिता से पूछा की पिताजी हम अपने दादाजी को वृदधा आश्रम में छोड़ने क्यूँ जा रहे हैं उसके पिता जी ने कहा की।

बेटा दादाजी बुड्ढे होगये हैं, इसलिए उन्हें वृदधा आश्रम में छोड़ने जा रहे हैं, तो लड़के ने कहा की पिताजी मैं भी जब बड़ा हो जाऊंगा और आप बुड्ढे हो जाएंगे तो मैं भी आपको वृदधा आश्रम में छोड़ दूंगा।

उस आदमी को अपनी गलती समझ में आगई और आदमी अपने पिता को लेकर अपने घर चला गया और उनकी देखभाल करने लगा।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की जैसे बड़े करते हैं, उनका देखकर ही उनकी तरह उनसे छोटे उम्र के लोग उनकी तरह करते हैं।

इसलिए हमे अपने बच्चे या अपने से छोटे बच्चो के सामने ऐसा कोई भी बुरा काम नही करना चाहिए जिससे वह आगे चलके बिगड़ जाए।

(11) आम और निम mango and nim moral story in hindi


एक समय की बात है एक किसान ने अपने खेत में तीन पेड़ के बीज बोये पहला पेड़ पपीते का दूसरा आम का और तीसरा निम का, किसान सबसे ज्यादा ख्याल आम के पेड़ का रखता था।

ताकि उसके ऊपर कीड़े न लग जाए आम के पेड़ को इस बात का घमंड होगया की यह किसान सबसे ज्यादा मेरा ख्याल रखता है इसका मतलब मैं इन दोनों से कहीं अधिक महान हूँ।

तीनो पेड़ दिन पे दिन बड़े होते गए लेकीन आम का घमंड कम होने का नाम नही वह पहले से और भी ज्यादा घमंडी होगया इस बात पर की मेरे पेड़ पे उगे फल को लोग बड़े चाव से खाते हैं।

और मेरे फल इतने मीठे होते हैं, और निम के पेड़ पे उगे बीज को कोई नही खाता, एक दिन कैन महान है इस बात पर आम और निम के बीच झगड़ा हुआ।

आम बोलता मेरे फल मीठे होते है, लोग इन्हें बड़े शव से खाते हैं, निम बोलता है, और निम बोलता है तुम्हारा आम ज्यादा खाने के वजह से जब कोई बीमार गिर जाता है यो वह मुझसे बानी औषधियों से वह ठीक होता है।

उन दोनों के बीच का झगड़ा सुनकर पपीता बोला अरे भाई आपस में क्यूँ लड़ रहे हो तुम दोनों ही महान हो एक औषधियों के लिए तो एक फल के लिए।

आम बोलन्हि तुम्हे हम दोनों में से किसी एक को महान बोलना होगा तो पपीता थोड़ा सोच विचार के बाद बोलता ही की निम महान है क्यूँ की उसकी पत्तियां, जेड, इसकी खाल, और उसकी बीज से हम औषधि बना सकते हैं।

आम बोला नही तुम झूठ बोल रहे हो ऐसा नही है यह कहकर आम ने उन दोनों से बाते करना बंद कर दिया कुछ महीनों बाद आम के पेड को कीड़े लग गए जिसकी वजह से उसकी सारी पत्तियां झड़ गई और आम सूखने लगा।

फिर किसान ने निम के पेड़ की पत्तियों को पीसकर आम के पेड़ पर डाला आम के पेड़ पर जो कोड़े लगे थो वह निकल गए और आम पहले के जैसा होगया और आम को मालूम पड़ गया की महान कौन है।

स्टोरी इन हिंदी फोर चाइल्ड

इन्हें भी पढ़े: raja harishchandra ki kahaniराजा हरिश्चंद्र का नाम सच्चाई के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है।

(12) मुर्गा और गांव वाले hen moral stories in hindi


एक समय की बात है, एक गांव में मुर्गा रहता था वह हर सुबह-सुबह उठकर बाँग देता था उसे लगता था की अगर वह बाँग नही देगा तो इस गांव में कोई भी नही उठेगा।

लेकीन वहाँ को कोई भी व्यक्ति उस मुर्गे की इज्जत नही करता था यह मुर्गे को बुरा लगता था की इतना महान काम करने के बाद भी उसकी इज्जत कोई भी नही करता।

एक दिन मुर्गे ने सोच की मैं कल सुबह बाँग नही दूंगा फिर देखता हूँ की कौन उठता है, मुर्गे ने अगेले सुबह बंग नही दिया लेकीन गांव के सभी लोग उठ गए और अपने-अपने काम धंधे पे चले गए।

फिर मुर्गे को उसकी ऐहिमियात मालूम पड़ी और उसका जो घमंड था वह चकना चूर होगया।

शॉर्ट स्टोरी फॉर किड्स इन हिंदी

(13) चूहे की मनमानी rat and cat new moral story in hindi


बहुत समय पहले की बात है एक महल में ढेर सारे चूहे रहते थे, महल का राजा ने उन चूहे को बहुत मारने का प्रयास किया बहुत सारे जड़ी बुटिया से भी मारने का प्रयास किया।

लेकीन वह चूहे नही मरते थे वह जो चाहे वह करते थे वह कभी राजा के सर पे चढ़ जाते और राजा को तांग करते राजा ने इन सब से तंग आकर।

भगवान के पास गया और बोला भगवान मुझे इन चूहो से छुटकारा पाने का कोई इलाज बताइए भगवान ने उस राजा को एक जानवर दिया और कहा यह जानवर जब भी चूहे को देखेगा उन्हें पकड़ कर खा लेगा।

राजा उस जानवर को महल में में लेकर आया वह जानवर जब भी चूहों को देखता उन्हें पकड़ कर खा लेता अब चूहे उस जानवर से बहुत डरने लगे थे, उसके डर के कारण चूहों उस महल से भाग गए और कभी लौट के नही आये।

राजा ने अभी तक इस जानवर का नाम नही रखा था राजा के दिमाग में फिर एक नाम सुझा राजा ने उस जानवर का नाम बिल्ली रखा यह जानवर बिल्ली के नाम से प्रसद्धि हो गया, इस तरह बिल्ली का जन्म हुआ।

(14) जन्मदिन happy birthday moral stories in hindi


बहुत समय पहले की बात है एक राजा के पास किसी भी चिझे की कमी नही थी उस राजा के पास धन दौलत बंगला महल सब कुछ था।

लेकीन राजा कभी पिता बनने का सुख न पा सका उसकी शादी के 10 शाल होने के बाद भी राजा ने मंदिरों में जाकर भगवान की प्राथना की।

भगवान से मन्नत मांगी तब कहीं जाके उसके घर में एक नन्हे से बच्चे का जन्म हुआ उस राजा ने बच्चे के जन्म को खूब धूम धाम से मनाया जो आज तक किसने भी नही मनाया था।

राजा ने फिर उस दिन को याद रखा और हर शाल अपने लड़के का जन्मदिन मानने लगा इस खुसी में की इसी दिन मेरा लड़का जन्म लिया था उस राजा को देखकर हर कोई ऐसा ही करने लगा इस तरह हर किसी का जन्मदिन मनाया जाता है।

(15) चिंटू का झूठ lie moral story in hindi


एक समय की बात है, चिंटू नामक छोटा सा लड़का था जो हमेसा हर बात पर झूठ बोलता और उसकी झूठ को लग सच मानकर कई बार धोखा भी खा चुके थे।

एक बार चिंटू के मम्मी पापा कुछ काम से बाहर गए और चिंटू को कहा की वह शाम तक लौटेंगे चिंटू घर में अकेला था उसने अपने मम्मी पापा से मसखरी करने का सोचा।

उसने अपने पिता को फोन लगया और बोला की पिताजी आप जल्दी आजिये मेरे पेट में आचानक दर्द उठ पड़ा है मेरा पेट बहुत दर्द कर रहा है, यह दर्द मुझसे सहन नही हो रहा है।

उसके मम्मी और पापा इस बात को सुनकर हड़बड़ी में वहाँ से निकले वह गाड़ी को फुल स्पीड से भगा रहे थे उन्हें अपने बेटे के पास जल्द से जल्द पहुंचना था इसलिए।

लेकीन उनकी गाड़ी की रफ्तार कुछ ज्यादा ही थी उनके गाड़ी के सामने ट्रक आगया उस ट्रक को देखकर चिंटू के पापा ने ब्रेक लगाने की कोसीस की लेकीन गाड़ी की रफतार इतनी थी की ब्रेक लगते लगते उनकी गाड़ी।

उस ट्रक से जा टकराई और उनका एक्सीडेंट होगया आस पास के लोगो ने उनको जल्दी से अस्पताल में भर्ती करवाया इस बात की खबर चिंटू को पड़ी।

चिंटू जल्द से जल्द अस्प्ताल पहुंचा और अपने मम्मी पापा की सलामती की दुआ मांगने लगा उसके मम्मी पाप की जान बच गई।

उसके पाप को होश आय तो उन्होंने सबसे पहले पूछा की मेरा चिंटू कैसा है वह ठीक तो है न उसके पेट में दर्द हो रहा था चिंटू ने इस बात को सुना वह सारी बाटे समझ गया।

की उसके वजह से उसके मम्मी पाप की यह हालात हुई है, उसे अपनी गलती का एहेसास हुआ और उसने कसम खाई की आज क्व बाद कभी भी झूठ नही बोलेगा।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे कभी भी झूठ नही बोलना चाहिए वार्ना हमारी एक छोटी से झूठ के वजह से क्या पता किसकी जान कब खतरे में आजाये।

(16) आदमी और शेर moral stories in hindi with man and lion


बहुत समय पहले की बात है, एक दिन एक आदमी जंगल के रास्ते से अपने घर के तरफ लौट रहा था, वह आदमी बहुत ही सीधा साधा था, वह हर किसी की मदत करता चाहे वो इंसान वो या फिर जानवर।

एक शेर जो बहुत दिनों से भूख था, खाने की तलाश में जंगल में भटक रहा था तभी शेर को वह आदमी दीख उस आदमी को देखकर शेर ने उसपर हमला करने की कोसीस की ।

जैसे ही शेर उस आदमी के ऊपर हमला करने जा रहा था तभी उसके पैर मे कांटा चुभ गया उसे चला नही जा राह था शेर जोर जोर से चिल्लाने लगा, बचाव.. बचाव.. बचाव… ।

उस आदमी ने शेर की आवाज सुनी और उसे बचाने के लिए वहाँ पर पहुंचा, वह आदमी सोचने लगा की अगर मैन इसको बचा लिया तो शेर मुझे कच्चा चबा जाएगा ।

शेर ने बोला सुनो भाई मेरे पैर में से ये काँटा निकल दो, आदमी ने कहा की नही… नही…. मैं तुम्हारे पैर में से काँटा नही निकलूंगा क्या पता कांटा निकलने के बाद तुम मुझे खजावो ।

शेर ने कहा नही मैं तुम्हे नही खाऊंगा मेरा विस्वास करो अगर तुमने मेरे पैर में से काँटा निकाला तो मैं तुम्हे इनाम दूंगा आदमी ने शेर की बातों के ऊपर भरोसा करके शेर के पैर में से काँटा निकाल दिया ।

शेर के पैर में से काँटा निकलने के बाद शेर को अच्छा महसूस हो रहा था, शेर वहाँ से जाने लगा तभी उस आदमी ने उसे बोला की मेरा इनाम कहाँ है ।

शेर ने कहा अरे मूर्ख मैं तुझे खाने वाला था अगर मेरे पैर में काँटा न चुभता तो, तूने मेरी मदत की इसलिए मैन तेरी जान बक्स दी अब जा यहाँ से वार्ना मैं तुझे खा जाऊंगा ।

सिख:- हमे कभी भी किसी के लालच भारी बातों में नही आना है, जैसे आदमी को लगा की शेर उसे बड़ा इनाम देगा इस वजह से उसने उसके पैर में से काँटा निकाला लेकीन शेर ने उसके मन मुताबिक नही किया ।

(17) शेर और समझदार हिरन wise deer and lion moral story in hindi


बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक शेर रहता था वह शेर बहुत ही खूंखार शेर था, वह जब भी सीकर करने जाता तो उसके हाँथ से एक भी सीकर बच्च के नही निकल पता ।

शेर अपने सीकर को आसानी से दबोच के खा लेता था, लेकीन यह शेर की ताकत हमेसा के लिए नही रही शेर दिन पे दिन बूढ़ा हो चला था शेर अब जब भी सीकर करने जाता तो ।

तो उसके हाँथ से सीकर आसानी से बच के निकल जाता शेर के बूढ़ा होने के वजह से उसकी रफ्तार और उसकी ताकत सब पहले जैसा नही रहा था, इसलिए शेर के हाँथ से सीकार आशानी से बच के निकल जाता ।

अब शेर ने सीकर करना छोड़ दिया था अब वह जनवरो को अपनी योजना से अपने जाल में फसता था, और उन्हें खाता था शेर ने जंगल के बीचो बीच एक गढ़ा बना के रखा था ।

वह गड्ढा बहुत छोटा था इतना की कोई भी जानवर उसके अंदर से छलांग लगके बाहर निकल जाता वह इसलिए की शेर को उस गड्ढे में आने जाने में तकलीफ न हो और शेर ने उस गड्ढे के ऊपर उसने ढेर सारी सी पत्तियां बीच्छा के रखी थी, ताकि किसी को मालूम न पड़े की यहां गड्ढा है।

ताकि उस रास्ते से कोई जाता तो व उस गड्ढे के अंदर गिर जाता शेर उस गड्ढे के आस पास ही रहता जब भी कोई उस गड्ढे के अंदर गिरता तो शेर जल्दी से जाकर उसके ऊपर हमला कर देता और उसे मार डालता ।

एक दिन उस रास्ते से एक हिरन गुजर रही थी हिरन बहुत चालख और अमझदार थी हिरन अपना हर एक कदम फूक फूक के रखती थी, हिरन ने देखा की वहाँ पर ढेर सारी सी पत्तियां है ।

और उसके आस पास के जगह में कोई भी पत्तियां नही है हिरण को सक हुआ की कुछ तो भी गड़बड़ है उसने जमीन के तरफ देखा की यहां पर ढेर सारे जनवरो के पैरों के निसान थे ।

लेकीन यह निसान आगे दिखाई नही दे रहे थे हिरन तुरंत समझ गई की इन पत्तियों के नीचे एक गड्ढा है, शेर ने देखा की हिरण उस गड्ढे के पास खड़े रहकर कुछ तो सोच रही उसे लगा की उस हिरण को इस गड्ढे के बारे में मालूम पड़ गया है ।

शेर ने सोच की मैं हिरण के ऊपर हमला कर देता हूँ जैसे ही शेर हिरण के ऊपर हमला करने के लिए गया, हिरण को पूरी बात समझ में आ चुकी थी वह वहाँ से फरहर हो गई और उस शेर के हाँथ नही आई ।

सिख:- हमे कभी भी अपने कदम फूक फूक कर रखने चाहिए क्या पता किस जगह पर क्या है, वार्ना हमे बहु उन जनवरो की तरह कोई सीकर बना लेगा ।

(18) दूधवाला short moral story in hindi


 

बहुत समय पहले की बात है एक गांव में एक दूधवाला रहता था वह दूधवाला हर सुबह सबसे पहले उठकर गांव के हर एक घर-घर में दूध पहुंचाने का काम करता था ।

दूध वाले को लगता की अगर मैं नही होता तो इन गांव वालो का क्या होता इन्हें दूध कौन देता, यह चाय कैसे पी पाते, इनके बच्चे छोटे बच्चे दूध कैसे पीते ।

एक दिन दूधवाला एक घर में दूध देने गया दूध वाले से उस घर के मालिक का गमला गलती से टूट गया फिर उस घर के मालिक ने उस आदमी को खरी खोटी सुनने लगा और उसके ऊपर चिल्लाने लगा ।

उस आदमी की आवाज सुन आस पास के आदमी इकट्ठे होगये और उस आदमी को उस दूधवाले को डाटते हुए देखते रहे किसीने कुछ नही कहा, दूध वाला वहाँ से चला गया ।

और वह घर जाके सोचने लगा की मेरी वहाँ कोई मदत करने भी नही आया और ना ही किसीने उस आदमी को मुझे खरी खोटी सुनने से रोक मेरी वजह से इन लोगो की सुबह की सुरुआत अच्छी तरह से होती है ।

कल मैं इनको दूध ही देने नही जाऊंगा फिर देखता हूँ यह लोग कैसे दूध पी पाते हैं और इनकी दिन की सुरुआत कैसे होती है दूधवाला उस दिन दूध देने नही गया ।

दूध वाले ने देखा की उसके दूध ना देने का कोई भी गांव वाले के ऊपर प्रभाव नही पड़ा वह लोग जैसे रोज रहते है वैसे ही हैं, दूध वाले को सबकुछ समझ में आगया की मेरे बिना इनका कोई भी काम नही रुकने वला मैं दूध दूं या फिर ना दूँ ।

इनकी दिन की सुरुआत अच्छी होगी उल्टा मेरा एक दिन का नुकसान होगया फिर आगे से दूध वाले ने दोबारा ऐसी गलती नही की ।

सिख:- हमे ऐसा कभी भी नही सोचना चाहिए की हमारी वजह से उस आदमी का काम रुक जाएगा ऐसा कभी नही होता हमारी वजह से कभी भी किसी भी आदमी का काम नही रुकता उनका काम हमारे बिना भी चलता रहता है, हम नही होंगे तो कोई और होगा

(19) आलसी बकरी lazy goat moral stories in hindi


बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक बकरी रहती थी, वह बकरी अपना काम कभी भी खुद नही करती थी वह हमेसा दुसरो के भरोसे बैठी रहती थी ।

बकरी की मा उसे हर चीज़ लाके देती थी वह खुद कुछ मेहनत नही करती थी, बकरी की मा उसे हमेसा कहती की बेटी मेरे बाद तुम क्या करोगी तुम्हारी देख भाल कौन करेगा ।

बकरी कहती की मा मुझे मेहनत करने की जरूरत नही पड़ेगी मेरे बहुत सारे मित्र हैं, वह मेरी मदत कर देंगे फिर मैं क्यूँ चिंता करूँ ।

एक दिन बकरी की मा बीमार पड़ गई और उसकी मा चल बसी अब बकरी का इस दुनिया में कोई भी नही था बकरी ने अभी भी अपना आलसी पाना नही छोड़ा था वह अपने मित्रो के भरोसे बैठी रहती ।

उसके मित्र खाना लाके देंगे बकरी के मित्रो ने बकरी के ऊपर दया खाकर कुछ दिनों तक उसे खाना भी लेक दिया लेकीन उसके मित्रो ने भी उसकी मदत करना छोड़ दिया क्यूँ की वह कुछ करती ही नही थी सारे काम उसके मित्र करते थे।

बकरी अपने हर एक मित्र के पास अपने लिए खाने की मदत मांगने गई लेकीन बकरी जिसके पास जाती वह उसकी मदत करने से मना कर देता बकरी निराश होकर घर लौट गई इस उम्मीद में की मेरा उदास चेहरा देखकर मुझे कोई खाना लाके देगा।

लेकीन ऐसा नही हुआ बकरी को किसने भी खाना लाके नही दिया बकरी की भूख बढ़ते ही जा रही थी, और उस भूख से तड़पती बकरी ने निश्चय किया की वह आज के बाद खुद का काम खुद करेगी किसके भरोसे नही बैठेगी ।

सिख:- हमे कभी भी अपना काम किसी के भरोसे पे नही छोड़ना चाहिए हमे अपना काम खुद करना चाहिए नही तो हमे भी बकरी की तरह भूख से तड़पना पड़ेगा ।

(20) मोनू बना सफल व्यक्ति motivational success stories with moral in hindi


मोनू नाम का एक लड़का था वह लड़का वैसे तो हुसियार था वह कभी दुसरो को जताता नही था की वह हुसियार है, उसकव अकेले रहना बहुत पसंद था ।

उसके ज्यादा मित्र नही थे मोनू हमेसा कुछ नया सोचता रहता मोनू एक सफल व्यक्ति बनना चाहता था और वह इसके लिए हर कोसीस करता जो भी सोचता वह करता लेकीन उसकी खराब आदत थी वह जो भी काम सुरु करता वह उसे खत्म नही करता, उसे बीच में ही छोड़ देता क्यूँ की आगे जाके उसे कुछ समझ में नही आता की वह क्या करे।

इस वजह से वह अभी तक सफल नही हुआ था, मोनू बाद में अपनी गलतियों के उपर पछताता की कास मैन इस काम को जारी रखा होता तो आज मैं सफल होता लेकीन वह फिर से वह गलती करता ।

क्यूँ की मोनू को जो पसंद है वह उसने आज तक किया ही नही वह बस पैसों के पीछे भगत रहा इसलिए वह सफल नही होता बहुत सी गलतियों के बाद मोनू को समझ की वह क्या गलती कर रहा है ।

फिर मोनू ने को जो पसंद था उसने उसके ऊपर काम करना सुरु किया बिना किसी लालच के और वह काम करते ही गया मोनू को पता भी नही चला की वह सफल कब होगया ।

फिर आगे से मोनू पैसे के पीछे न भाग के जो उसे पसंद था उसके पीछे भाग और वह सफल होगया ।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे कभी भी उस चीझ के पीछे नही भग्न चाहिए जो हमे नही आता है क्यूँ की हमे जाके उसके बारे में कुछ सोच नही पाते हैं, और बीच रास्ते में ही छोड़ देते हैं ।

हमे जो आता है उस चीज़ के पीछे भागना चाहिए क्यूँ की हम उसके अंदर कभी असफल नही होंगे हमे उसके बारे में ज्यादा जानकारी होगी और हम उसके अंदर और बेहतर कर पाएंगे ।

(21) खीर किसने खाया khir kisne khaya moral stories in hindi


moral short story in hindi

एक जंगल में तीन पक्के दोस्त रहते थे लोमड़ी, खरगोश, और भालू वह हमेसा साथ साथ रहते थे हर सुख दुख में एक दूसरे के काम आते थे।

एक दिन तीनो एक पेड़ के नीचे बैठे हुए थे भालू को बहुत तेज भूख लगी थी भालू बोला की चलो आज कुछ मीठा खाते हैं, खरगोश ने बोला क्या मीठा खावोगे भालू ने कहा कुछ नया।

लोमड़ी ने कहा की क्यूँ न हम खीर बनाकर खाये खीर का नाम सुनते ही तीनो के मुह में पानी आगई भालू और खरगोश ने लोमड़ी की बात में हामी भर दी ।

खरगोश कहने लगा मुझे तो खीर बनाने नही आता है, भालू ने कहा मुझे भी नही आता है, लोमड़ी ने कहा फिकर मत करो मुझे बनाने आता मैं बनाउंगी ।

तुम बस खीर बनाने के लिए समान लेकर आवो, भालू नव पूछा की मुझे बोलो क्या क्या लगेगा मैं लेके आता हूँ लोमड़ी ने कहा की हम सब मिल बटकर लेके आएंगे भालू तुम ऐसा करो दूध लेकर आवो।

और खरगोश तुम शक्कर लेके आवो और मैं चावल लेकर आता हूँ, और यह सब लाने के बाद हम जंगल के बरगद वाले पेड़ पे मिलते हैं दोनों ने लोमड़ी की बात मान ली और।

तीनो अलग अलग रास्ते चले गए अपना अपना समान लाने भालू दूध डेयरी पे गया दूध लाने के लिए लेकीन उस दूध डेयरी पे उस दुकान का मालिक था भालू उस आदमी के जाने का इंतिजार करता रहा ।

बहुत देर इंतिजार करने के बाद वह आदमी कुछ देर के लिए अपने दुकान से बाहर गया कुछ काम से भालू ने मौका देखकर दुकान के अंदर गया और दूध लेकर आगया और वहां से तेजी से भाग गया ।

खरगोश शक्कर लाने के लिए किराने के दुकान पर गया किराने के दुकान का मालिक दुकान में नही था खरगोश ने मौका देखकर शक्कर लेकर वहाँ से भाग गया ।

moral short story in hindi

लोमड़ी चावल लाने के लिए किसान के घर गई लोमड़ी ने देखा की किसान धान को पिट रहा था और उसमे से चावल निकल रहे थे लोमसी उसे कैसे भी लेना छाती थी लेकीन किसान के डर के मारे वह वहाँ नही जा रही थी।

लोमड़ी ने किसान के हटने के इंतिजार किया बहुत समय बाद इंतिजार करने के बाद किसान घर के अंदर खाना खाने गया लोमड़ी ने मौका देखकर एक थैली में चावल को रखा और वहां से चली गई।

तीनो लोमड़ी के बतेये हुए जगह पर चले गए लोमड़ी ने एक बड़े से पतीले में दूध को डाल और बोली हमे खीर को पकाने के लिए चूल्हा जलन पड़ेगा उसके लिए मुझे लकड़ियां और ईंटे चाहिए खरगोस दौड़कर जंगल में गया और सुखी लकड़ियां लेकर आया ।

भालू भी जंगल में गया और कुछ ईंटे लेकर आया फिर उन लकड़ियों को लोमड़ी ने पत्थर क्व सहारे आग लगाई और उस दूध के पतीले को उसके ऊपर रक दिया और उसके अंदर शक्कर और चावल डाल दिया और वह खीर को पकाने लगी ।

खीर के पकने के बाद उसमे से खुसभु आने लगी और खिसबु को सूंघ भालू और खरगोश को रहा नही जा रहा था वह बोल रहे थे जल्दी करो मित्र हमे और तेजी से भूख लगी है ।

लोमड़ी ने कहा की बस कुछ देर और रुक जावो होगया है खीर के पकने के बाद लोमड़ी ने भालू के सहायता से उस पतीले को चूल्हे पे से उतारकर जमीन पर रख दिया लिमडी ने कहा की हम लोग खीर को खाने से पहले नदी में हाँथ धोकर और मंदिर में दर्शन कर के आते हैं।

तीनो पहले नदी में हाँथ धोने गए खरगोश और भालू का हाँथ धोना होगया था वह दोनों जा ही रहते तो उन्होंने देखा की अभी तक लोमड़ी का हाँथ धोना नही हुआ है खरगोश ने पूछ की तुम्हे इतना देर क्यूँ हो रहा है चलो अगर हाँथ धोना होगया हो तो।

शॉर्ट स्टोरी

लोमड़ी ने कहा की तुम लोग चलो मैं तालाब के अंदर नहाके आती हैं मेरा सरीर गंदा होगया है दोनों ने कहा ठीक है हम मंदिर में दर्शन करने जा रहे हैं तुम वहाँ आजान दोनों मंदिर में दर्शन करने चले गए उन दोनों का दर्शन करना होगया था ।

उन्होंने अपने शेर पे तिलक लगाया और लोमड़ी का इंतिजार करने लगे की वह मंदिर में दर्शन करने आएगा लेकीन कुछ समय इंतिजार करने के बाद भी लोमड़ी नही आई तो खरगोश ने कहा की लोमड़ी अभि तक नहा रही होगी वह नहा के मंदिर में दर्शन करके आजायेगी तब तक हम बरगद के पेड़ के पास चलते हैं।

भालू ने कहा ठीक है हम ऐसा ही करते हैं, चोलो हम चलते है, दोनों बरगद के पेड़ के पास गए और उन्होंने देखा की खीर से भरा हुआ पतीला खाली है दोनों सोचने लगे की खीर किसने खाया है।

तभी वहां पर लोमड़ी आती है और कहती है अरे यह क्या खीर तुम लोगो ने मेरा बिना ही पूरा खा लिया मेरे लिए रखा भी नही दोनों ने कहा की नही हमने खीर नही खाया है हमारे गैर मौजुदगी में किसी और ने खीर खाया है।

लोमड़ी कहने लगी जाने दो कोई बात नही हम अगली बार खीर खाएंगे हमारे नसीब में यह खीर नही था दूसरे किसी के नसीब में था खरगोश बहुत ही चतुर था वह तुरंत समझ गया की खीर लोमड़ी ने ही खाया है।

लेकीन खरगोश अपनी बात को साबित करना चाहता था की वह सही है, उसने लोमड़ी से पूछा की तुम अभी तक कहाँ थी लोमड़ी ने घबराहट भरी आवाज में कहा की मैं अभी नहाके और मंदिर से पूजा कर के आ रही हूँ ।

फिर खरगोष ने कहा की तुम्हारा सरीर तो गिला नही है, फिर तुमने कैसे नहाया लोमड़ी और घबरा गई और बोली मैं.. वो… जब रहिईईई थी तो मेरे सरीर का सारा पानी सुख गया हो ।

खरगोश नव कहा ठीक है तुम मंदिर में दर्शन करने गए थे ने तुम्हारे माथे पे तो कोई भी तिलक नही है हिरन डर के मारे बोली की वह रास्ते में मैन ही मिटा दिया ।

खरगोश ने कहा की तुम्हारे मुह पे यह चावल के डेन कहाँ से लोमड़ी समझ गई की खरगोश को सब कुछ मालूम पड़ गया है उसने कहा की मुझे माफ करना मित्रो मैन ही खीर खाया है तुम्हे मंदिर में भेजकर नहाने के बजाए मैं यहां सीधे आगई और खीर को खा ली।

मुझे लगा की तुम्हे कभी पता नही चलेगा और मैं बच जाऊंगा लेकीन मैं गलत था, मुझे माफ करदो क्या करूँ खीर को देखकर मेरे मुह में कब से पानी आ रहा था इसलिए मैन खीर को खा लिया।

मुझे माफ करदो मुझसे बहुत बड़ी गलती होगई आगे से मैं ऐसा कभी नही करूँगा मुझपर भरोसा रखो दोनों ने लोमड़ी की गलती के लिए उसे माफ कर दिया और उसे फिर से अपना दोस्त बना लिया ।

सिख:- चोर कितनी भी चोरी या फिर कितना भी झूठ क्यूँ ना बोल ले आख़ीर कार उसकी चोरी पकड़ी ही जाती है, जिस तरह लोमड़ी की एक गलति के वजह से उसकी चोरी आशानी से पकड़ी गई

(22) चल्हाख हिरन deer moral stories in hindi


moral of the story in hindi

बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक नदी में मगरमच्छ रहता था उस मगरमच्छ ने उस नदी के सारे मछलियों को खा गया था वह उस नदी का राजा था ।

उस नदी के पास जो भी जानवर पानी पीने आता मगरमच्छ उसे धर दबोचता और खा लेता एक दिन नदी में पानी पीने के लिए हिरन आया ।

हिरन ने देखा की नदी का पानी बहुत शांत है, जो की आम तौर पे होता नही है क्यूँ की नदी में मछलियां हलचल करती रहती है हिरन को लगा की पानी में कोई जहरीली पदार्थ है।

यह सोचकर वह आगे नही गई हिरन ने जमीन के तरफ देखा तो उसे मालूम पड़ा की नदी के अंदर कोई भी जहरीली पदार्थ नही है बल्कि कोई पानी का जानवर है जो पानी पीने वालो को धर दबोचके खा लेता है।

हिरन को इस बात का पता ऐसा चला की जब उसने जमीन के तरफ देखा तो बहुत सारे जनवरो के पैर के नदी के तरफ जाने के निसान थे नदी से वापस लौटने के नही इसलिए हिरन समझ गया की कुछ तो गड़बड़ है।

और उसने उस नदी का पानी नही पिया और पूरे जंगल को बात दिया की नदी में कोई जानवर है जो पानी पीने वालो को पकड़ के खा रहा है उस नदी के पास कोई भी पानी पीने नही जाना ।

(23) हिरन और लोमड़ी deer and fox moral stories in hindi for kids


short moral stories in hindi

एक जंगल में हिरन रहती थी वह हिरन जंगल में अकेले ही रहती थी एक दिन हिरन जंगल में घास चरने गई, हिरन अपने मस्त मगन में घास चार रही थी ।

तभी हिरन के करीब के एक लोमड़ी आगई लोमड़ी अपने आप को दुसरो से हमेसा शातिर समझती थी, वह हिरन को खाने के इरादे से गई थी लोमड़ी सोचने लगी की मैं छुप के वार नही करूंगी।

मैं पहले हिरन को बात देती हूँ की मैं तुम्हे खाने वाली हुँ, वैसे भी हिरन मेरा क्या बिगड़ लेगी मैं ताकतवर के साथ साथ चालख भी हूँ और हिरन मूर्ख है उसने हिरन को कहा।

सुनो हिरन मैं तुम्हे खाने वाला हूँ तुम जो कर सकती हो कर लो आज तुम मेरे हांथो से नही बचोगी हिरन बोली थिख है मुझे खाने से पहले मेरी आखरी इक्षा पूरी कर दोगे लोमड़ी बोली ठीक है बतावो तुम्हारी इक्षा।

हिरन बोली तुम मुझसे दो कोष दूर जावो और मेरे ऊपर हमला करो लोमड़ी बोली बस इतनी सी इक्षा यह तुम्हारी इक्षा मैं अभी पूरी कर देता हूँ।

लोमड़ी जैसे ही दो कोष दूर जाने के लिए उस जगह से गया तो वहाँ से हिरन फरहर होगई और जब वह वाप्स उस जगह पे लौट के आया तो उसने देखा की वहां हिरन नही थी हिरन वहाँ से भाग चुकी थी ।

लोमड़ी अपना सर पीटकर उस जगह से वाप्स चली गई।

सिख:- हमे कभी भी अपने आप को दुसरो से ज्यादा होशियार और ताकतवर नही समझना चाहिए क्या पता कौन कैसा हो ।

(24) मुन्नू और दादाजी grandfather moral story in hindi


short srories hindi

एक गांव में मुन्नू नामक लड़का अपने माता पिता और दादा के साथ रहता था, मुन्नू के दादा रिटायर फॉरेस्ट ऑफिसर राह चुके थे मुन्नू जब भी अपने दादा से कहानी सुनने की जिद करता तो ।

तो मुन्नू के दादाजी उसे अपने जंगल के किस्से सुनाते और मुन्नू के दादा किस्से सुनाते सुनाते भाऊक हो जाते और बोलते की काश मैं वाप्स उस जंगल में जा पता कुछ दिनों के लिए ।

अपनी पुरानी यादे ताजा करने के लिए मुन्नू ने निश्चय कर लिया की वह अपने दादा को उस जंगल में लेके जाएगा उसने अपने माता पिता को सारी बात बताई और कहा की हम दादाजी को सरप्राइज देंगे ।

उन्हें नही बताएंगे की हम उन्हें उस जंगल में लेके जा रहे हैं, उन्होंने ऐसा ही किया मुन्नू के दादाजी बहुत खुस हुए, उनके खुसी का ठिकाना नही था उस जगह पर लौट कर ।

इन्हें भी पढ़े: story of ahilyabai holkar in hindi अहिल्याबाई होलकर जो उस ज़माने की कैसी भी आपदाओ में अपनी राज्य और प्रजा की सेवा की जय अहिल्यादेवी.

(25) सोनू फस गया moral story in hindi


moral short story in hindi

सोनू नामक एक बहुत ही सरारती लड़का रहता था, सोनू जब भी अपने स्कूल से लौटता तो अपनी चिझे इधर से उधर फेक देता जैसे की अपना जूता, मोजा, अपना, बैग, अपने स्कूल के कपड़े, अपना टिफीन बैग।

सोनू की मा हमेसा समझती की सोनू बेटा अपनी चिझे सही जगह पर रखो नही तो बाद में नही मिलेगा सोनू जो चिझे फेक देता उन चिझो को उसकी माँ सही जगह पर रख देती।

एक दिन सोनू के माँ कुछ काम से दो दिन के लिए बाहर गई थी, सोनू की वही पुरानी आदत वह स्कूल से आया और अपनी चिझो को इधर से उधर फेक दिया लेकीन इस बार उन चिझो को समेंटने वाला कोई नही था।

सोनू जब सुबह सोकर उठा स्कूल जाने के लिए तो वह अपनी चिझे खोजने लगा लेकीन उसे भी याद नही था की उसने अपनी चिझो को कहाँ रखा है।

तो सोनू बिना कपड़े और बिना जूते के ही स्कूल चला गया, जब स्कूल के प्रिंसिपल ने सोनू की यह हालात देखी तो उसे स्टेज पर बुलाया और कहा की बिना कपड़े और जूते के तुम स्कूल में नही आ सकते घर जावो।

और कपड़े और जूते पहनकर आवो अवु ने प्रिंसिपल के सामने कुछ नही बोला और अपने घर चला गया अब सोनू को अपनी गलती का एहेसास होगया था क्यूंकि उसे पूरे स्कूल के सामने अपमान होना पड़ा।

अब सोनू अपनी चिझो को अपनी अपनी जगह पर रखता है ताकि उसे स्कूल जाते वक्त मिल जाए ।

सिख:- इस कहानी से हमे यह सिख मिलती है की हमे कभी भी अपनी चिझो को अपनी सही जगह पर रखनी चाहिए वार्ना हमारी हालात भी सोनू की तरह हो जाएगी।

(26) सरारती चुन्नू naughty boy moral story in hindi


moral short story in hindi

एक चुन्नू नामका एक लड़का था चुन्नू बहुत हि सरारती लड़का था, चुन्नू के पाप अमीर आदमी थे चुन्नू अपने घर में बहुत ही सरारत करता वह अपने घर की हर एक चीज़ को तोड़ता चुन्नू को अपने घर की चिझे तोड़ने में मजा आती थी।

और चुन्नू के पापा जो भी चुन्नू को पैसे देते वह एक कुएं में फेक के आजता और अगर चुन्नू के पाप चुन्नू को पैसे ना देते तो चुन्नू पैसे को चुराकर उन्हें कुएं फेकता उन पैसे को चुन्नू को फेकने में मजा आती।

चुन्नू के पाप चुन्नू के इस हरकत से बहुत तांग रहते थे चुन्नू के पाप को लगता की चुन्नू अभी बच्चा है जब बाद होगा तो सुधार जाएगा लेकीन ऐसा नही हुआ।

शरारती चुन्नू बड़ाहोकर सुधरने की बजाए और बिगड़ने लगा दिन पे दिन उसकी और सरारत बढ़ने लगी चुन्नू अभी भी उस कुएं में रोजाना पैसे डालता और अपने घर की वस्तुवों को तोड़ता और खुस होता चुन्नू के पाप को समझ में नही आरहा था की वह क्या करे चुन्नू को कैसे समझाए, उसकी आदत को कैसे सुधारे।

चुन्नू के पापा को एक योजना सूझी उन्होंने चुन्नू को अपने पास बुलाया और कहा की तुम जावो और आज मुझे कुछ पैसे कमा के दिखावो और उन पैसे से अपने लिए कुछ ख़रीद लेना।

short hindi stories with moral

अगर तुमने ऐसा नही किया तो मैं तुम्हे घर से बाहर निकल दूंगा और अपनी जायजाद से भी चुन्नू ने अपने पिता की बातों में हामी भर दी और पैसे कमाने के लिए चला गया।

चुन्नू ने बहुत से दुकानों पे काम के लिए पूछा लेकीन कोई भी चुन्नू को काम देने के लिए राजी नही था, चुन्नू उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया वहाँ से एक आदमी गुजर रहा था।

उस आदमी ने चुन्नू का उदास चेहरा देखकर पूछा की क्या हुआ भाई ऐसे उदास क्यूँ बैठे हो कुछ तकलीफ है तो मुझे बतावो मैं दूर कर दूंगा चुन्नू ने कहा मुझे काम चाहिए सिर्फ एक दिन के लिए।

moral short story in hindi

मैन बहुत से दुकानों में जाकर पूछा लेकीन कोई भी मुझे काम देने के लिए राजी नही है इसलिए मौ उदास बैठा हूँ, उस आदमी ने कहा बस इतनी सी बात चलो मैं तुम्हे काम देता हूँ।

वह आदमी चुन्नू को डेहारी मजदूरी के लिए लेके गया उस आदमी ने चुन्नू से पूछा की तुम यह सब काम कर लोगो ने तुम्हे पैसा शाम को मिल जाएगा चुन्नू ने कहा मैं कर लूंगा बस एक दिन की ही तो पैट है।

और चुन्नू काम करने लगा, शाम को सारा काम खत्म होगया और चुन्नू को 200 रुपये मिले चुन्नू ने उन 200 रुपये में से अपने पिता के बतेये अनुसार उसने एक समान खरीद और वह अपने पिता के पास गया।

और बोला पिताजी जैसा आपने मुझे बोला था मैन ठीक वैसा ही किया है, उसके पिताजी ने कहा की जो तुम वास्तव लेकर आये हो उसे तोड़ दो तुम्हे तो तोड़ने में मजा आता है।

चुन्नू ने कहा नही पिताजी यह मेरी मेहनत की कमाई का है मैं इसे नही तोडूंगा मैन इसे पाने के लिए आज पूरे दिन मेहनत की है उसके पिताजी ने कहा थिख है इसे मत तोड़ो लेकीन अपने पैसे को कुएं में फेक के आवो पैसे फेकने में तो तुम्हे बड़ा मजा आता है।

वह चुन्नू ने कहा नही पिताजी मैन इस पैसे को पाने के लिए आज पूरी धूप में कड़ी मेहनत की है मैं इसे कैसे फेक दु मैं इसे भी कुएं में नही फेंकूँगा।

चुन्नू के पिताजी ने कहा की जो तुम रोज-रोज मेरे ऐसी घर के वस्तुवों को तोड़ते थे वह भी तो मेरी मेहनत का ही था और जो तुम पैसे कुएं में फेकते थे वो भी तो मैन कड़ी मेहनत से ही कमाया था तो सोचो मुझे कितना दुख होता होगा।

मैने तुम्हे पैसे की कीमत समझाने के लिए यह सबक सिखाया बस, चुन्नू को अपनी अभी तक की सारी गलतियों का एहेसास होगया था उसने अपनी सारी गलतियों के लिए अपने पिता से माफी मांगी।

(27) चतुर सेवक- moral kahani


एक गांव था जिस गांव का नाम श्यामपुर था । उस गांव में एक किसान रहता था। वह अपने नोकर के साथ रहता था। एक दिन किसान को दो आम मिला वह आम लेकर घर आ रहा था। रास्ते मे उसे एक साधु बाबा मिले । किसान साधु बाबा को गौर लगकर बोलै बाबा आप आज हमारे घर भोजन खाने चलिये। बाबा ने किसान के साथ उसके घर आये।

घर आकर उसने नौकर से खाना बनाने को कहा और आम धोकर काट दे। इतना कह किसान बाहर किसी काम से चला गया आम के खुशबू से नौकर के मुह में से पानी आ रहा था। उसने एक छोटा टुकड़ा खा लिया। उसका और खाने का मन किया । वह थोड़ा थोड़ा करकर सारा आम खा लिया। आम खत्म हो गया।

अब वह सोचा में पर गया कि किसान आएगा तो क्या जबाब देगे। उसे एक उपाय झुझा । वह साधु के पास जाकर छुरी पिजाने लगा। साधु ने पूछा यह क्या कर रहे हो । उसने कहा किसान रोज एक बाबा को बुलाते हैं और दोनों कान काट लेते हैं। यह बात सुन साधु बाबा वह से भागे उसी वक़्त किसान वापस आया ।

उसने बाबा को भागते देखकर किसान ने पूछा बाबा आप भाग क्यो रहे हो । तब तब नौकर बोल पड़ा की दोनो आम चुराकर भाग रहे हैं। किसान उनके पीछे दौरा, एक आम तो दे दीजिए.

साधु ने सोचा एक कान मांग रहा है। ऐसा समझकर वह और भी तेजी से वहाँ से भाग गया। वह बार बार एक ही बात सोच रहा था कि क्या समय है। आज आम लेकर साधु भाग गया।

किसी पर ज्यादा भरोसा नहीं करना चाहिए।

(28) पुजारी और भगवान की कहानी


एक बार एक गांव में एक पुजारी रहता था। उसका भगवान पर बहुत भरोसा था वह सोचता था कि चाहे कुछ भी हो जाए भगवान उसे हमेशा बचाएंगे। एक दिन जब वह पूजा कर रहा था तब गांव में बाढ़ आ गई। तब गांव की मुखिया ने सब को सुरक्षित जगह पर जाने को कहा। और पुजारी ने इन बातों पर ध्यान नहीं दिया और वह सोचा कि भगवान ही मुझे इन परेशानियों से बचाएंगे।

और वह अपने मंदिर में ही बैठ गया फिर बाढ़ के पानी ने मंदिर को भी घेर लिया और पुजारी घुटनों तक डूब गया। तभी एक आदमी अपनी कार लेकर आया और पुजारी को बोला कि हालात और खराब हो जाए ।उससे पहले आप मेरी कार में बैठ जाइए पुजारी ने उसे मना कर दिया और वह मंदिर में ही बैठ गया ।थोड़ी देर बाद मंदिर की दीवारें पानी में डूबने लगी तो वह गुंबज पर बैठ गया ।तभी एक आदमी नाव में आया और उसने पुजारी जी को बोला कि आप डूब जाएंगे।तो मेरी नाव में आ जाइए हम आपको किनारे पर छोड़ देंगे। तब पुजारी बोला कि मैं नहीं आऊंगा मेरा भगवान मुझे बचा लेगा तुम जाओ बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ने लगा था।

और गुंबद तक पहुंच गया था और पुजारी डूबने लगा था। उसके बाद हेलीकॉप्टर आया पर पुजारी ने उसको भी यह कहकर भेज दिया कि भक्त का भगवान उसे बचाएगा। और पुजारी बाढ़ के पानी में डूबने लगा।

पुजारी पानी में डूब गया

और फिर पुजारी भी उस पानी में डूब गया। फिर मरने के बाद मैं भगवान के पास गया। और उन्हें बोला हे प्रभु आपने मेरा विश्वास तोड़ा है मैं इसी भरोसे बैठा रहा। उस मंदिर में कि आप आकर मुझे बचाएंगे, पर आप मुझे बचाने आए ही नहीं।

तब भगवान बोले अरे मूर्ख मैं तुम्हें 4 बार बचाने आया था। पर तू मुझे पहचान नहीं पाया और अपनी जान गवा बैठे। तब पुजारी सोच में पड़ गया तब उसने भगवान से पूछा हे प्रभु आप कब आए थे। तब भगवान बोले – पहली बार में मुखिया बनकर आया और मैंने बाढ़ की चेतावनी दी पर तूने नहीं माना फिर मैंने तेरे लिए कार भेजी तो उसमें भी नहीं बैठा

मैंने तेरे लिए नाव भेजी तब तो उसे भी मना कर दिया, फिर मैंने तुझे अपना अच्छा भक्त मानकर आखिरी हेलीकॉप्टर भेजा पर तूने उसे भी मना कर दिया और तू अपनी जान खुद गवा बैठा। पुजारी को अपनी गलती का एहसास हो गया और उसने भगवान से माफी मांगी।

शिक्षा-  भगवान इंसान के रूप में आपको मदद करने आते हैं तो कोई भी आपकी मदद करें तो आपको ले लेनी चाहिए ना कि बैठकर भगवान का इंतजार करना चाहिए।

moral short story in hindi

Moral story in hindi:- तो मेरे प्यारे मित्रो कैसी लगी आपको यह सारी कहानिया मुझे कमेंट कर के जरूर बतेये अगर किसी chhoti kahani कहानी में मुझसे कुछ गलती होगई हो तो मुझे माफ कर देना और आगे बढ़ जाना अगर आपको यह वेरी शॉर्ट स्टोरी इन हिंदी कहानी पसंद आई है तो अपने मित्रो के साथ जरूर शेयर करे.

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *