Pipal devta ki kahani ,पीपल देवता की कहानी

Pipal devta ki kahani:नमस्कार दोस्तों हम आपके लिए पितृपक्ष की एक पौराणिक कहानी लेकर आए हैं।

Pipal devta ki kahani पौराणिक कथा पीपल की पूजा

Pipal devta ki kahani
पीपल देवता की कहानी

 

एक समय की बात है, किसी गांव में मंगला नाम का एक किसान रहता था। वह खेती-बाड़ी से अपना घर चलाता था। भाग्यवश जब भी उसके कोई संतान होती, तो उसकी अकाल मृत्यु हो जाती। इस तरह मंगला के छ बच्चे काल का ग्रास बन गए। इस दुख से मंगला और उसके पत्नी बहुत दुखी रहते थे।

एक समय ऐसा आया जब मंगला के घर में बंधे पशुओं ने भी दूध देना बंद कर दिया तथा खेतों में फसल भी नाम मात्र को रह गई। अपने ऊपर आते एक के बाद एक संकट से वह दोनों बहोत चिंता में रहते थे। मंगला ने देखा की खेत में स्थित पीपल का पेड़ सूखने लगा।

फिर एक दिन वह दोनों पति-पत्नी पीपल के उस पेड़ के निचे बैठे अपने ऊपर आये इस दुःख और संकट की बात कर रहे थे। बात करते-करते वह जोर जोर से रोने लगे, उनके रोने की आवाज वहा से गुजर रहे एक महात्मा के कानों में पड़ी, महात्मा ने सोचा ऐसी कौन सी आपदा है जो यह दोनों एक साथ रो रहे हैं। वह महात्मा पीपल के वृक्ष के नीचे बैठे किसान और उसकी पत्नी के पास पहुंचे। महात्मा को देखकर दोनों ने उन्हें प्रणाम किया। महात्मा के पूछने पर मंगला ने उन्हें अपनी आप बीती सुना दी, वह बोला कई वर्षों से हम संतान का दुख झेल रहे हैं और अब अपने पशु और खेतों में लगे वृक्षों का दुख झेलना हमारे बस की बात नहीं है।

महात्मा की महानता

उनकी ऐसी दशा को देखकर महात्मा बोले-तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो तुम्हारे खेत में लगा यह पीपल का वृक्ष तुम्हारे सभी दुखों का नाश करेगा। आज के बाद तुम रविवार को छोड़कर अन्य छह दिनों तक इस पीपल को दूध, जल और तेल से सींचना तथा संध्या के समय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाना और सातवें दिन यानी रविवार को पीपल में जल चढ़ाने की जगह दूध मिश्रित जल सूर्य भगवान को अर्पित करना, तुम्हारे ऊपर आया सारा संकट कट जाएगा। ऐसा कहकर वह महात्मा वहां से चले गए।

मंगलाने महात्मा के कहे अनुसार अगले दिन से ही अपने खेत में थे पीपल को सींचना शुरू कर दिया और संध्या में वो पीपल के वृक्ष के नीचे तेल का दीपक जलाने लगा। देखते ही देखते मंगला के संकट कटने लगे। वह पीपल का वृक्ष फिर से हरा भरा हो गया। खेत में फसल लहलहा ने लगी, पशुओं ने दूध देना शुरू कर दिया और एक वर्ष बाद मंगला को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। दोनों पति-पत्नी खुशी-खुशी अपने पुत्र के साथ रहने लगे। उनके घर की दरिद्रता दूर हो गई।

महात्मा से फिर से दर्शन होना

एक दिन मंगला को फिर से उन महात्मा के दर्शन हुए। मंगला और उसकी पत्नी ने पुत्र सहित महात्मा को प्रणाम किया और कहा- प्रभु आपके आशीर्वाद से हमें संतान सहित सर्वस्व सुख प्राप्त हुआ है। महात्मा बोले- यह मेरा आशीर्वाद नहीं बल्कि तुम्हारे पित्र पूर्वजों का आशीर्वाद है। जिनका दोष तुम्हें लगा हुआ था। पितरों को खुश रखने या उनकी शांति के लिए पीपल की पूजा सर्वोपरि बताई गई है।

इसलिए हर मनुष्य को पितरों की शांति के लिए पीपल में जल अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से पितृ प्रसन्न रहते हैं और घर में हर तरह की खुशहाली बनी रहती है।

हे… पीपल के देव, जैसे मंगला के कष्ट काटे वैसे ही कथा को सुनने वाले सुनाने वाले, हुकारा भरने वाले, सब पर कृपा बनाए रखना सब को सुख शांति और समृद्धि देना ।

ये Pipal devta ki kahani पौराणिक कथा पीपल की पूजा कैसी लगी comment में हमें जरुर बताइयेगा, धन्यवाद…

इन्हें भी पढ़े

विष्णु भगवान के दस अवतार कौन से है जाने यहाँ click करके

dhruv tara in hindi,कहानी बालक ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की

Spread the love

Leave a Comment