raja ki kahani in hindi, राजा की कहानिया

बेहतरीन यहाँ पे हमने raja ki kahani in hindi दी है जो आपको बहोत पसंद आएगी. raja ki kahani जो पुराने ज़माने में घटित हुई.

raja ki kahani in hindi, बेहतरीन राजा की कहानिया

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राजा और रानी की शादी | raja aur rani ki shaadi  कहानी – 1


शाहीनगर नामक एक राज्य था और उसके राजा नरेंद्र चौधरी थे, शाहीनगर राज्य बहुत ही खुशहाल और समृध्ध राज्य था। उस राज्य में किसी भी चीज़ की कमी नही थी, राजा अपने प्रजा को बेटे जैसा प्यार करता, और प्रजा भी राजा को अपना भगवान मानती राजा को शिकार करना बहोत अच्छा लगता था।

लेकीन उस राजा की अभी तक शादी नही हुई थी। राजा को रोजाना कई राजकुमारियों के रिश्ते आते लेकीन उन राजकुमारियों में से राजा को कोई भी राजकुमारी पसंद नही आती। राजा से एक दिन मंत्री ने राजा से पूछा की महराज आपको कैसी राजकुमारी पसंद आएगी।

तो राजा बोला मुझे ऐसी लड़की पसंद है जिसे मेरी दौलत से प्यार न हो, नही इस महल से और वह दिल की साफ होनी चाहिए, प्रजा को अपने बेटे जैसा मानती हो ऐसी चाहिए, मंत्री थोड़ा मुस्कुराये और बोले आपको ऐसी लड़की खुद ढूढ़नी पड़ेगी वह भी एक गरीब बन कर राजा मंत्री के सुझव से अति प्रसन्न हुए और बोले ठीक है।

मैं काल से ही ऐसी लड़की को ढूढना चालू करता हूँ, राजा गरीबो के पोशाक भेस पहनकर निकल पड़े अपनी मंजिल की तलाश में। इस बीच उन्होंने कई लड़कियों से मुलाकात की लेकीन उन्हें कोई भी लड़की पसंद नही आई। हर लड़की के अपने अपने जीवन साथी को लेकर बड़े बड़े ख्वाब थे, और यह राजा को पसंद नही आता।

राजा थक के बैठा था

एक दिन एक राजा एक पेड़ के नीचे थक हार के बैठा हुआ था, तभी उस राजा को कुछ सिपाही और एक डोली दिखाई दी, राजा एक सिपाही से पूछ बैठा की इस डोली में कौन है तो सिपाही बोला नागा राज्य की राजकुमारी सीता बैठी हुई है, राजा ने उस सिपाही से पूछा की राजकुमारी कहाँ जा रही है, उस सिपाही ने बोला पास ही में एक मंदिर हैं, वहाँ माता के दर्शन करने जा रही हैं यह बोलके सिपाही चला गया ।

राजा उस राजकुमारी को देखने के लिए बड़ा ही बैतूल हो रहा था, राजा ने उस राजकुमारी के डोली के पीछे-पीछे  चलने लगा और जब मंदिर आया तो राजकुमारी उस डोली में से उतरी राजा ने जब राजकुमारी की पहली झलक देखा तो उस राजकुमारी के ऊपर लट्टू हो गया और राजा राजकुमारी को टुकुर-टुकुर देखता ही रहगया ।

सोचने लगा राजा की क्या यह राजकुमारी मेरे मन मुताबिक है या नही, तो राजा ने उससे जाकर कहा मैं शाहीनगर राज्य का राजा हूँ, क्या आप मुझसे शादी करेंगे लड़की ने ना कहा और वहाँ से चली गई, राजा को यह सुनकर बहुत अच्छा लगा की राजकुमारी को मेरे दौलत और महल से प्यार नही है ।

राजा ने फिर उस राजकुमारी का पीछा किया और उसके राज्य जा पहुंचा, अब राजा को उस राजकुमारी के स्वभाव के बारे में जानना था, तो राजा ने वहाँ के प्रजा से उस राजकुमारी के बारे में जानने की कोसीस की, तो वहाँ के लोग बोलने लगे की हमारी राजकुमारी देवी है, वह सारि प्रजा को अपने बेटे जैसा प्यार करती है, और वह हर सुबह और शाम गरीबो में धन और आनाज बाटती है ।

उन राजकुमारी के गुणगान सुनके राजा बहोत खुश हुआ

यह सुनकर राजा अति प्रसन्न हुआ, राजा ने उस राजकुमारी से विवाह करने का निश्चित कर लिया। लेकीन राजकुमारी ने राजा से विवाह करने से मना कर दिया था, राजा सोच में डूब गया की अब क्या किया जाए, राजा ने राजकुमारी के पिता से बाते की और कहा की मैं आपके बेटी से शादी करने चाहता हूँ, राजकुमारी के पिता ने कहा की हमारी बेटी को अगर तुम पसंद आये तो हम शादी के लिए राजी हैं।

जब राजा ने राजकुमारी से शादी की बात की तो राजकुमारी ने राजा के सामने तीन शर्ते रखी, पहली शर्त राजा को राजकुमारी को तलवार बाजी में हराना होगा राजा ने यह शर्त मान ली और राजकुमारी को तलवार बाजी में हरा दिया ।

फिर राजकुमारी ने राजा के सामने दुशरी शर्त रखी और कहा की तुम्हे अगर मुझसे शादी करनी है तो तुम्हे प्रजा में से किसी एक की हत्या करनी होगा, राजा ने यह दूसरी शर्त सुनकर राजकुमारी से विवाह करने से मना कर दिया। और कहा की प्रजा मेरे लिए मेरे बेटे जैसे है मैं उनकी हत्या नही कर सकता, यह सुनकर राजकुमारी प्रसन्न हुई और कहा तुम दुशरी शर्त भी जीत गए, और कहा की मैं तुम्हारी परीक्षा ले रही थी की तुम अपने प्रजा से प्यार करते हो या फिर नही।

राजकुमारी की तीसरी शर्त

राजकुमारी ने फिर राजा के सामने तीसरी और आखरी शर्त रखते हुए कहा की तुम्हे एक पहेली सुलझानी होगी और वह पहेली यह है, आपके पास 8 सिक्के हैं जो देखने में एक दम एक समान हैं, आपको पता लगाना हैं की उसमे से एक सिक्का नकली हैं , और नकली सिक्का बाकी सब सिक्को से जरा सा वज़नी है. अगर – आपके पास एक बैलेंस तराजू है (पर कोई बात नहीं) लेकिन उस तराजू से आप सिर्फ 2 बार ही तौल सकते हैं तो नकली सिक्के को कैसे पहचानेंगे?

राजा थोड़ा सोचने लगा थोड़े देर सोच विचार करने के बाद राजा ने कहा, 3 – 3 सिक्के निकाल कर तराजू के दोनों ओर रखे, अगर – दोनों पलड़ा बराबर हैं तो इन छे सिक्को को छोड़कर बचे 2 सिक्को को एक एक पलड़े पर रक्खे जो भारी निकले वो नकली हैं, अगर एक तरफ पलड़ा भारी है तो , भारी पलड़े के 3 में से दो सिक्के निकाले और उन्हें तौल ले – अगर बराबर हो तो बचा हुआ सिक्का नकली हैं, अगर एक भारी हो तो वो सिक्का नकली है ।

यह सुनकर राजकुमारी ने कहा की, सही जवाब और शादी के लिए राजी हो गई राजा ने राजकुमारी से शादी कर ली और उसके साथ अपना जीवन हंसी खुसी बिताने लगा।

यह raja ki kahani in hindi खत्म करने से पहले मैं आपसे जानना चाहूंगा की राजकुमारी को कैसा लड़का चाहिये था, अगर आपको इसका जवाब मालूम है तो आप मुझे comment  करके जरूर बताये, और यह भी बताना की आपको कहानी कैसी लगी।

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चिंता से छुटकारा पाने के लिए राजा और साधू की कहानी-2


 

पुराने समय की बात है । एक राज्य में एक राजा राज्य करता था । उसका राज्य बहुत ही खुशहाल था । धन-धान्य कि उसके राज्य में कोई कमी नहीं थी । राजा और प्रजा खुशी-खुशी अपना जीवन यापन कर रहे थे ।

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एक राजा की कहानी

 

एक वर्ष उस राज्य में भयंकर अकाल पड़ा, पानी की कमी से फसलें सूख गई । ऐसी स्थिति में किसान राजा को लगान (कर) नहीं दे पाए । लगान प्राप्त ना होने के कारण राजस्व में कमी आ गई और राजकोष खाली होने लगा, यह देख राजा चिंता में पड़ गया । हर समय वह सोचता रहता कि राज्य का खर्च कैसे चलेगा?

अकाल का समय निकल गया स्थिति फिर से पहले की तरह सामान्य हो गई किंतु राजा के मन में चिंता घर कर गई । हर समय उसके दिमाग में यही रहता कि राज्य में पुनः अकाल पड़ गया तो क्या होगा? इसके अतिरिक्त भी अन्य चिंताएं उसे घेरने लगी । पड़ोसी राज्य कब है, मंत्रियों का षड्यंत्र, जैसी कई चिंताओं ने उसकी भूख प्यास और रातों की नींद छीन ली,

वह अपनी इस हालत से बहुत परेशान था । किंतु जब भी वह राजमहल के माली को देखता तो आश्चर्य में पड़ जाता. दिन भर मेहनत करने के बाद वह शाम को रूखी सूखी रोटी बनाकर खाता और पेड़ के नीचे बड़े मजे से सोता, कई बार राजा को उस से जलन होने लगी थी ।

अचानक एक दिन राजदरबार में साधू का आना-raja ki kahani in hindi

एक दिन राजा के दरबार में एक शिव साधु पधारे राजा ने अपनी समस्या साधु को बताई और उसे दूर करने का सुझाव मांगा । साधु राजा की समस्या अच्छी तरह समझ गए थे । वह बोले राजन तुम्हारी चिंता की जड़ राजपाट है । अपना राजपाट पुत्र को देकर चिंता मुक्त हो जाओ ।

इस पर राजा बोला- गुरुवर मेरा पुत्र मात्र 5 वर्ष का है । वह अबोध बालक राजपाट कैसे संभालेगा । तो फिर ऐसा करो कि अपनी चिंता का भार तुम तो मुझे सौप दो,-साधु बोले!

राजा तैयार हो गया । उसने अपना राजपाट साधु को सौंप दिया । इसके बाद साधु ने पूछा – अब तुम क्या करोगे? राजा बोला सोचता हूं कि अब कोई व्यवसाय कर लू, लेकिन उसके लिए धन की व्यवस्था कैसे करोगे अब तो राजपाट मेरा है । राजकोष  के धन पर भी मेरा अधिकार है । साधु बोले,

तो मैं कोई नौकरी कर लूंगा । राजा ने उत्तर दिया ।

यह ठीक है, लेकिन यदि तुम्हें नौकरी ही करनी है तो कहीं और जाने की आवश्यकता नहीं । यही नौकरी कर लो,मै तो साधू हु, मैं अपनी कुटिया में ही रहूंगा । राज महल में ही रहकर मेरी ओर से तुम ये राजपाट संभालना ।

राजा ने साधू की बात मान ली और साधु की नौकरी करते हुए राजपाट संभाले लगा । साधु अपनी कुटिया में चले गए ।

कुछ दिन बाद साधु पुनः राजमहल आए और राजा से भेंट कर पूछा? कहो राजन अब तुम्हें भूख लगती है या नहीं और तुम्हारी नींद का क्या हाल है ।

गुरुवर, अब तो मैं खूब खाता हूं, और गहरी नींद सोता हूं, पहले भी मै राजपाठ का कार्य करता था । अभी करता हूं, फिर यह परिवर्तन कैसे? यह मेरी समझ के बाहर है ।

राजा ने अपनी स्थिति बताने के साथ ही प्रश्न पूछ लिया । साधु मुस्कुराते हुए बोले -राजन पहले तुमने काम को बोझ बना लिया था और उस बोझ को हर समय अपने मस्तिष्क पर ढोया करते थे । किंतु राजपाट मुझे सौंपने के उपरांत तुम समस्त कार्य अपना कर्तव्य समझकर करते हो, इसलिए तुम चिंता मुक्त हो ।

तो दोस्तों इस raja ki kahani in hindi कहानी कि सीख यह है कि जीवन में हम चाहे जो भी कार्य करें उसे अपना कर्तव्य समझकर करें ना कि बोझ समझ कर, यही चिंता से दूर रहने का तरीका है ।

 


राजकुमारी और चांदी की टोकरी की कहानी, raja ki kahani- 3


Rajkumari Ki Kahaniyan Hindi

एक था राजा उसका नाम था चित्रसेन उसका महल गोदावरी के किनारे था महल में कई नौकर नौकरानी थे उन नौकरों में एक का नाम था समर्थ वह राजकुमारी की सेवा किया करता था।

राजकुमारी का नाम था नंदिनी वह जितनी सुंदर थी उतनी ही अकडू भी थी।

एक दिन की बात है प्रातः काल का समय था नंदिनी महल के साथ लगे हुए बाग में से फूल तोड़ने गई समर्थ भी उसके साथ था राजकुमारी नंदिनी ने बाएं हाथ में चांदी की टोकरी पकड़ी हुई थी दाएं हाथ से वह फूल चुन चुन कर टोकरी में रखती जा रही थी।

जब टोकरी फूलों से भर गई तो राजकुमारी महल की ओर चल पड़ी समर्थ उसके साथ-साथ चला।

मार्ग में उन्हें एक सफेद तथा लंबी दाढ़ी वाला वृध्ध दिखाई दिया उस वृध्ध के सिर पर लंबी-लंबी जटाए थी उस वृद्ध के चारों और बहुत से लोग जमा हो गए थे।

नंदिनी ने समर्थ से कहा जाकर पता करो कि वह वृद्ध कौन है और लोग इसके इर्द-गिर्द क्यों जमा है।

समर्थ चला गया और कुछ ही देर में पता करके वापस आया कहने लगा वह गरीब एक बड़ा ज्योतिषी है वह किसी को भी बतला सकता है कि उसका विवाह किससे होगा।

राजकुमारी चकित हुई उसने कहा समर्थ जाओ उसी से पूछ कर आओ मेरा विवाह किससे होगा?

समर्थ चला गया और कुछ मिनट बाद वापस आकर नीचे मुंह करके खड़ा हो गया।

नंदिनी ने पूछा क्यों क्या हुआ ज्योतिष महाराज ने क्या कहा?

समर्थ ने डरते डरते कहा ज्योतिषी ने ऐसी बुरी बात बताई है कि मैं आपके सामने कह नहीं सकता।

राजकुमारी ने कुरूद होकर कहा तुम्हें बतानी होगी, समर्थ बोला ज्योतिषी ने ऐसी बात कही है कि मैं उसे जबान पर नहीं ला सकता।

रानी नंदनी का गुस्सा

नंदिनी का पारा चढ़ गया तुम्हें बताना होगा कि उसने क्या कहा यह मेरी आज्ञा है।

समर्थ ने कहा आपकी आज्ञा है तो बताता हूं ज्योतिषी ने कहा कि आपका विवाह मुझसे होगा यानी राजकुमारी नंदिनी का विवाह समर्थ से।

बदतमीज नंदनी को गुस्सा आ गया मुझसे ऐसी बात कहने का तुझे साहस कैसे?

इतना कहते-कहते राजकुमारी ने फूलों से भरी चांदी की टोकरी समर्थ के माथे पर दे मारी फिर वह मुंह फेर कर पैर पटकने हुई राज महल को चली गई।

चांदी की टोकरी माथे के साथ टकराने से समर्थ के मस्तक पर घाव हो गया और लहू बहने लगा उसे भी गुस्सा आ गया उसने कहा राजकुमारी होगी तो अपने घर की होगी मन में इतना कहकर वह अपना सामान बांध कर दूसरे देश की ओर चल पड़ा।

समर्थ का रूठ के दुसरे देश चले जाना

कई दिन पैदल चलने के बाद समर्थ एक पड़ोस के नगर में जा पहुंचा। वहां उसने एक सेठ के यहां नौकरी कर ली। उसके परिश्रम और इमानदारी से खुश होकर सेठ ने उसे अपना सहायक बना लिया था कुछ दिन बाद वहां के राजा का स्वर्गवास हो गया नीति के  अनुसार लोग नया राजा चुनने के लिए एकत्र हुए बहुत से राजकुमार और धनी साहूकार वहां आए।

थोड़ी देर में बैंड बाजों के साथ बादशाही हाथी वहां आया वह धीरे-धीरे आगे बढ़ा उसने एक एक करके सभी राजकुमारों और साहूकारों को देखा परंतु रुका नहीं वह बढ़ता बढ़ता समर्थ के पास आकर रुक गया। उसने पुष्पमाला समर्थ के गले में पहना दी लोग ने राजा की जय जय कार कर उठे।

समर्थ को उस देश में वस्त्र तथा हीरे जवाहरात से जुड़े गहने पहनाए गए। फिर बाजे गाजे के साथ उसका जुलूस निकाला गया उसके जयघोष से धरती आकाश गूंज उठे।

राज गद्दी पर बैठते ही समर्थ ने अच्छा शासन चलाया वह दयालु तथा न्यायप्रिय राजा साबित हुआ उसका यश चारों और फैलने लगा।

रानी का विवाह

राजा चित्रसेन ने जब महाराज समर्थ का इतना गुणगान सुना तो धूमधाम से समर्थ से अपनी पुत्री नंदिनी का विवाह कर दिया।

महाराज समर्थ नंदिनी की डोली लेकर अपने महल में पहुंचे। रात को जब दोनों आमने-सामने बैठे तो नंदिनी ने पूछा आपके माथे पर यह चोट का निशान कैसा है।

समर्थ ने कहा यह निशान मेरे अच्छे भाग्य की निशानी है। इसी ने मुझे महाराज बनाया और इसी ने तुम्हारा पति।

नंदिनी ने चकित होकर कहा, क्या पहेलियां बुझा रहे हैं। साफ-साफ कहिए ना यह चोट आपको कहां लगी?

समर्थ ने कहा अच्छी बात है तुम जरा ठहरो मैं अभी सारी बात बताता हूं।

इतना कहकर समर्थ चला गया थोड़ी देर बाद समर्थ ने आकर कहा याद करो की क्या? इतना कहकर उसने नंदनी को चांदी की टोकरी दिखलाई।

टोकरी देखकर पहले दोनों कुछ उलझन में पड़ गई। फिर एक आकर उसे याद आ गई की है टोकरी उसी की थी।

उसने कहा हो यह टोकरी तो मेरी है।

नंदिनी ने समर्थ की ओर ध्यान से देखा दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया।

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ये राजा रानी की की कहानी आपको कैसी लगी कमेंट में बताइये.

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