raja ki kahani prerak kahani

raja ki kahani

एक राजा था । वो राजा बड़ा मोडी था । कुछ लोग मोड़ी होते है । मुड है तो काम ठीक करेंगे मुड नहीं है तो काम नहीं करेंगे । ऐशा मोडी राजा था राजा को गुस्सा बहोत आता था । जिनको क्रोध बहोत आता है वो लोग बडे खतरनाख होते है । क्योकि नजाने कब उनको जोश आ जाए और तुम्हारे ऊपर टूट सकते है । तो राजा का एक मंत्री था और राजाने उन्हें एक काम दिया और कहा की इस काम को कल पूरा करके ले आइए । मंत्री कल आया भी नहीं और काम पूरा किया भी नहीं और परसों जब आया तब राजा का क्रोध का पारा बहोत ज्यादा था ।

राजा की कहानी
raja ki kahani

राजाने कहा मैंने कहा कल आ जाना काम पूरा कर देना पर तुम आये भी नहीं और काम किया भी नहीं तो उस मंत्री ने कहा की राजा साहेब हम तो आपके बालक है । भूल हो गई तो राजा ने सिपाहियों को आदेश दिया की सिपाहियों इस मंत्री को शिकारी कुत्तो के बाड़े में फेक दो बीस शिकारी कुत्ते पाल रखा था । और जिससे राजा नाराज होता था उसको राजा ने इस २० शिकारी कुत्तो के बाड़े में फेकावा देता था । कुत्ते 2 मिनट में नोच डालते थे और खा जाते थे जिन्दा इन्शान को

राजा की कहानी
raja ki kahani

अब उस मंत्री ने सोचा की चलो अब अंत तो होना ही है । तो क्यों न कुछ बुध्धि से काम करू राजा से प्रार्थना किया की राजा साहेब एक काम करो मरूँगा तो पक्का है । भाग कर भी कहा जाऊंगा आपके राज्य में रहना है । तो दस दिन की छुट्टी हमको चाहिए । राजा बोले दस दिन की छुट्टी क्यों तू कही भाग गया तो इस राज्य से दुसरे राज्य में मंत्री बोला मै वादा करता हु में भागूँगा नहीं । लेकिन दस दिनका मौका चाहिए । तो राजा ने दस दिन का मौका दे दिया । 8 दिन बित गए आया नहीं नव दिन बीत गये आया नहीं और दस दिन बित गये आया नहीं राजाने सोचा लग रहा है मंत्री तो धोखा देके चला गया है । और ग्यारवे दिन भी सुभह नहीं आया दोपहर नहीं आया शाम को आया शामको चार बजे राजाने देखा उसको तो उसके चहेरे पे जरा भी दुःख नहीं था । आपको अगर कोई ज्योतिषी भी बता दे की तुम ५ दिन बाद या सात दिन बाद मरोंगे तो तुम्हारा चहेरा उदास हो जायेंगा । पुरे घर वालो को गभराहट हो जाएँगी । लेकिन उस मंत्री को जरा भी दुःख नहीं जबकि उसको पता है आज मुज़को समाप्त होना है । वो मंत्री अपने घर में आपनी पत्नी को भी कुछ बताके नहीं आया बच्चो को भी नहीं बताया

राजाने कहा सिपाहियों इस मंत्री को पकड़ो और घसीट के ले जाओ और शिकारी कुत्तो के पास फेक दो जिन्दा कुत्ते नोच कर ख़तम कर देंगे उसको शिकारी कुत्तो के बाड़ा के अन्दर उस मंत्री को राजा के सिपाहियों ने डाल दिया धकेल दिया और बीस शिकारी कुत्ते छोड़ दिए गए । राजा के दरबार के लोग जनता भी देख रही है राजा भी देख रहा है मंर्त्री भी देख रहे है सिपाही भी देख रहे है । की अब खेल ख़तम होने वाला है ।

शिकारी कुत्ते हिंदी कहनिया

लेकिन कुछ और उल्टा हो गया की बीस शिकारी कुत्ते छलांग लगा के आये और आके उस मंत्री के पैर चूमने लगे पैर चुमते थे मुह चुमते थे लिपट रहे थे । तो राजा ने कहा ये बात क्या हो गयी ये भूखे और खूंखार शिकारी कुत्ते उन्हें प्रेम कैसे करते है । खा जाना चाहिए था लेकिन ये कुत्ते कैसे इतना प्रेमी हो गये । जब कुत्तो ने नहीं खाया और नहीं कटा और नहीं नोचा तो राजा ने दो घंटे के बाद उस मंत्री को बाड़े में से बहार निकला गया मंत्री सुरक्षित है कुछ नहीं हुआ तो मंत्री से पूछा के मंत्री ये तो बतादो की ये कुत्ते दो मिनट में किसी को भी नोच डालते है । तो फिर आपको इतना प्यार क्यों करते है । ये तो बहोत बड़े शिकारी और भयानक कुत्ते है । लेकिन तेरे से इतना प्रेम क्यों तेरा पैर चूम रहे है तेरे को लिपट रहे थे तेरेको क्या मंत्री बोले राजा साहेब दस दिन मैंने आपसे छुट्टी मांगी थी वो दस दिन की छुट्टी में मैंने कुछ और नहीं किया वो दस दिन मैंने इस शिकारी कुत्तो के बिच में बिताया हु इनको स्नान कराया हु खिलाया हु पिलाया हु के इनकी खातिरदारी में मैंने बस इन्ही दस दिन में यही किया है इसलिए अब ये कुत्ते मुज़को क्षमा कर देते है । तो

 राजा साहेब ये दस दिन की सेवा का फल है । लेकिन मुझे हँसीi आती है । आपकी सेवा मैंने चालिस साल तक किया एक छोटी सी गलती हो गयी और आप हमको क्षमा नहीं कर पाए । और ये कुत्तो की सेवा मैंने बस दस ही दिन किया तब भी वह कुत्तो ने हमको क्षमा कर दिया राजा साहेब बिचार करो आप राजा हो ये कुत्ते है इनमे कौन मुर्ख है ।

राजा की सोच

राजा सोचने लगा की वास्तव में में गलती कर रहा हु जो इस समय निर्णय लेना ठीक नहीं है । राजाने कहा मंत्री आज तूने मेरी बंध आँखे खोल दिया है । मैंने जो गुस्सा में आके सेकंडो लोगो को कुत्तो को खिलाके मरवा डाला लेकिन आज तूने मुझे ज्ञान की आंखे खोल दी है । अब में जोस और क्रोध में निर्णय नहीं लूँगा अब में बहोत विवेक पूर्वक फैसला लूँगा और लोगो को क्षमा भी करूँगा । पुरे दरबार में तालियों की बौछार से मंत्री की बुध्धि को सम्मान किया गया ।

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